
Dhami Chanchari Dance: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को बद्रीनाथ धाम पहुंचे। यहां उनका एक बिल्कुल अलग और देसी अंदाज देखने को मिला। धामी ने बद्रीनाथ के पास बामणी गांव में स्थानीय महिलाओं के साथ पारंपरिक 'चांचड़ी' डांस किया। उन्होंने गांव वालों से बातचीत की और वहां की संस्कृति को करीब से जाना। इसके बाद सीएम धामी बद्रीनाथ धाम की एक लोकल दुकान पर रुके, जहां उन्होंने दूध और जलेबी का मजा लिया। उन्होंने वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से भी खूब बातचीत की।
मुख्यमंत्री ने बद्रीनाथ में नारायण पैलेस रोड पर स्थित श्री नारायण स्वामी मंदिर के पास आयोजित 'श्री बद्रीनाथ कथा महोत्सव' में भी हिस्सा लिया। मानसून के बाद अब चारधाम यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसी बीच बद्रीनाथ में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं और सीएम धामी का यह दौरा इसी का हिस्सा है। इससे पहले रविवार को धामी ने श्री बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की। उन्होंने उत्तराखंड और यहां के लोगों की सुख-समृद्धि के लिए भगवान बद्री विशाल से आशीर्वाद मांगा।
चारधाम यात्रा को लेकर सीएम धामी ने कहा कि इसका पहला चरण ऐतिहासिक रहा है और एक नया रिकॉर्ड बना है। अब तक करीब 51 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा, "बाबा केदार और हमारे सभी पवित्र धामों की कृपा से यात्रा का पहला चरण वाकई ऐतिहासिक रहा है। इसने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। लगभग 51 लाख तीर्थयात्री और श्रद्धालु पहले ही दर्शन कर चुके हैं, और मानसून के बाद अब यात्रा का दूसरा चरण चल रहा है।"
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधाजनक यात्रा और आसान दर्शन के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्गों पर सड़कों का काम भी चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान बद्री विशाल के मास्टर प्लान पर तेजी से काम हो रहा है। हालांकि, उन्होंने माना कि ऊंचाई वाले इस इलाके में निर्माण कार्य के लिए समय कम मिलता है, जो एक बड़ी चुनौती है।
सीएम का यह दौरा बद्रीनाथ में चल रहे दो दिवसीय 'देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव' के समय हुआ है। यह महोत्सव 19 और 20 सितंबर को 'ऑपरेशन सद्भावना' के तहत आयोजित किया गया।
भारतीय सेना और चमोली जिला प्रशासन ने मिलकर इस महोत्सव का आयोजन किया है। इसमें उत्तराखंड के लोक नृत्य, संगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक खानपान की झलक देखने को मिल रही है। महिलाओं के स्वयं सहायता समूह, कारीगर, किसान और युवा कारोबारी भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
इस सांस्कृतिक महोत्सव की थीम "हमारी विरासत, हमारा भविष्य" रखी गई है। इसका मकसद सीमावर्ती इलाकों की स्थानीय परंपराओं, उत्पादों और टैलेंट को एक मंच देना है। साथ ही, नई पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
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