
Uttarakhand Agniveer Scheme: भारत के युवाओं के लिए सेना में शामिल होना सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जज़्बा है। लेकिन 'अग्निपथ योजना' के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के मन में हमेशा एक बड़ा और अनसुलझा सवाल तैरता रहता था-"चार साल के बाद हमारा क्या होगा?" इस बड़े सस्पेंस और युवाओं की चिंता को भांपते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है, जो देश के इतिहास में मिसाल बनने जा रहा है। राज्य में देश का पहला 'अग्निवीर रोज़गार सेल' (ARC) स्थापित किया जा रहा है। यह सेल यह सुनिश्चित करेगा कि जब देश की सेवा करने के बाद हमारे जांबाज अग्निवीर वापस लौटें, तो उन्हें रोज़गार के लिए दर-दर न भटकना पड़े, बल्कि उनके सामने शानदार करियर के रास्ते खुले हों।
उत्तराखंड का यह खास रोज़गार सेल पूर्व अग्निवीरों के लिए करियर के पांच बड़े और आकर्षक रास्ते खोलने जा रहा है। अग्निवीरों को आम ज़िंदगी और कॉर्पोरेट जगत में ढालने के लिए अब सरकार खुद आगे आकर उनका हाथ थामेगी। इस पहल के तहत जिन 5 बड़े क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, वे हैं:
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि युवाओं को उनके भरोसे छोड़ने के बजाय, रोज़गार सेल उन्हें करियर काउंसलिंग देगा और सीधे सही नियोक्ताओं से जोड़ेगा। 31 दिसंबर, 2026 को जब अग्निवीरों का पहला बैच अपनी 4 साल की सेवा पूरी करके लौटेगा, उससे ठीक पहले इस सेल को पूरी तरह एक्टिव मोड में ला दिया जाएगा।
ये भी पढ़ें… VIDEO: जंतर-मंतर से कनॉट प्लेस तक बवाल! पत्थरबाज़ी, इंटरनेट बंद...आधी रात को आखिर हुआ क्या?
अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 साल की उम्र में भर्ती होने वाले इन युवाओं में से 25% लोग तो 1 फरवरी, 2027 से रेगुलर आर्म्ड फोर्सेज़ (सेना) में अपनी सेवा जारी रखेंगे। लेकिन असली चुनौती उन 75% युवाओं की है जो आम नागरिक के रूप में समाज में वापस लौटेंगे। इस बदलाव को बेहद आसान और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार एक 'डिजिटल स्किल बैंक' तैयार कर रही है। इसके तहत हर लौटने वाले अग्निवीर का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा। उनकी मिलिट्री ट्रेनिंग, तकनीकी महारत, अनुशासन और प्रोफेशनल लीडरशिप क्वालिटीज़ का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। यही नहीं, जो अग्निवीर कॉर्पोरेट जगत की मांग के अनुसार खुद को ढालना चाहते हैं, उनके लिए 10 से 15 दिनों के शॉर्ट-टर्म स्किल डेवलपमेंट और अपग्रेडेशन कोर्स भी चलाए जाएंगे।
यह कोई सामान्य कागज़ी योजना नहीं है, बल्कि इसका सीधा नियंत्रण और देखरेख खुद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा की जाएगी। सरकार ने पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, सुरक्षा सेवाओं, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक खेती, खेल, मैन्युफैक्चरिंग और आपदा प्रबंधन जैसे 50 से भी ज़्यादा सेक्टर्स की पहचान की है जहाँ इन अनुशासित युवाओं को तुरंत नियुक्त किया जा सके। यह रोज़गार सेल ट्रेंड अग्निवीरों, सरकारी विभागों, स्किल डेवलपमेंट एजेंसियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच एक मज़बूत और अचूक पुल का काम करेगा।
उत्तराखंड सरकार ने सिर्फ रोज़गार सेल ही नहीं बनाया, बल्कि नीतिगत स्तर पर भी अग्निवीरों के भविष्य को पूरी तरह सुरक्षित कर दिया है। राज्य सरकार की नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10% हॉरिजॉन्टल रिज़र्वेशन (क्षैतिज आरक्षण) की ऐतिहासिक घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भर्तियों में भी इन युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सेना की नौकरी इन युवाओं के जीवन का पहला अध्याय थी, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उनका दूसरा अध्याय भी उतना ही गौरवशाली और सार्थक होगा, ताकि देश की रक्षा करने वाले ये वीर समाज के निर्माण में भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।
अग्निवीरों की सेवा समाप्ति के बाद रोजगार को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। ऐसे में उत्तराखंड की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भविष्य में दूसरे राज्य भी इसी तरह के रोजगार सेल स्थापित कर सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पहला बैच जब दिसंबर 2026 में सेना से लौटेगा, तब यह व्यवस्था उन्हें कितनी प्रभावी और स्थायी रोजगार सहायता उपलब्ध करा पाएगी। यदि योजना अपने उद्देश्य में सफल रही, तो यह केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में अग्निवीरों के पुनर्वास और करियर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है।
ये भी पढ़ें… भारत के 6,358 ब्लैक कॉरिडोर का डरावना सच! 3 साल में 37 हजार मौतें, फिर भी बड़ा सवाल बाकी
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।