सेंट्रल दिल्ली में आधी रात भारी बवाल! NEET परीक्षा विरोध में पथराव के बाद इंटरनेट बंद। पुलिस अफसर घायल, पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा 'समय बर्बाद न करें'? जानिए इस रात का पूरा सच।
Delhi Clash 22 July 2026: बुधवार, 22 जुलाई की रात को देश की राजधानी दिल्ली ने एक ऐसा खौफनाक मंजर देखा, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की चूलें हिलाकर रख दीं। NEET परीक्षा में कथित धांधली और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अचानक हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के पास का इलाका देखते ही देखते जंग के मैदान में बदल गया। रात के करीब 8:30 बजे टॉल्स्टॉय मार्ग के पास हवा में अचानक पत्थर और बोतलें तैरने लगीं, जिसके बाद पूरी सेंट्रल दिल्ली में दहशत और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया।
टॉल्स्टॉय मार्ग पर खूनी संघर्ष: ACP समेत कई जांबाज अफसर अस्पताल पहुंचे
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी अराजकता तब शुरू हुई जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया क्रॉसिंग के पास हजारों की तादाद में छात्र और प्रदर्शनकारी संसद मार्च के लिए आमादा थे। तभी भीड़ के बीच छिपे कुछ उपद्रवियों ने सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ पत्थरबाज़ी और बोतलों से हमला शुरू कर दिया। इस अचानक हुए जानलेवा हमले में ड्यूटी पर तैनात कनॉट प्लेस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) विवेक भगत गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए RML अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में दो ACP, दो इंस्पेक्टर और कई पुलिस कॉन्स्टेबल लहूलुहान हुए हैं, जिनकी सही संख्या का आकलन अभी भी किया जा रहा है।
विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
जैसे ही हिंसा की आग फैली, दिल्ली पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठाए। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के अनगिनत गोले छोड़े गए, जिससे चारों तरफ धुएं का गुबार और अफरातफरी मच गई। चश्मदीदों के मुताबिक, टॉल्स्टॉय मार्ग और जनपथ की सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने थे। हालात बेकाबू होते देख तुरंत रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों को मैदान में उतारा गया। भारी सुरक्षा घेरे और बैरिकेड्स की मदद से काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी चरम पर है।
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डिजिटल ब्लैकआउट: जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवा ठप, सियासी गलियारों में हड़कंप
इस हिंसक टकराव के बीच सरकार ने सुरक्षा और अफवाहों को रोकने के नाम पर इलाके के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह से बंद कर दीं। इस डिजिटल ब्लैकआउट के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए लिखा, "जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवा बंद। क्या सरकार किसी और बर्बर कार्रवाई की योजना बना रही है?" इस कार्रवाई ने तुरंत एक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया। लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया और चेतावनी दी कि युवाओं की आवाज़ को दबाने का कोई भी गलत कदम सरकार के लिए विनाशकारी साबित होगा।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: 'हमारा समय बर्बाद न करें, हम वीडियो नहीं देखेंगे'
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पुलिस की कथित बर्बरता के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेहद सख्त लहजे में कहा, "हमारा समय बर्बाद न करें। हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते।" कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि फिलहाल न्यायपालिका इस जमीनी विवाद और कानून-व्यवस्था के मसले में हस्तक्षेप करने के मूड में नहीं है।
विरोध-प्रदर्शनों का सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफिक पर क्या असर पड़ा?
विरोध-प्रदर्शनों के कारण सेंट्रल दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे पुलिस को एडवाइजरी जारी करनी पड़ी और यात्रियों से कनॉट प्लेस और जनपथ जैसे मुख्य इलाकों से बचने को कहा गया। सुरक्षा कारणों और भारी पुलिस तैनाती के कारण दुकानें बंद रहीं और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए रोक दी गईं।
केसी वेणुगोपाल ने क्या कहा?
लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला" बताया। उन्होंने लिखा, “यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है, जिसका मकसद भारत के युवाओं की आवाज़ को दबाना और दिल्ली पुलिस की बर्बरता को छिपाना है।” उन्होंने आगे कहा, "पीएम मोदी ने जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे भारी घबराहट फैल रही है। सावधान रहें, मिस्टर मोदी - युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन को कुचलने के लिए उठाया गया कोई भी गलत कदम बेहद विनाशकारी साबित होगा और जनता आपको ऐतिहासिक सज़ा देगी।"
सख्त कार्रवाई के बावजूद विरोध-प्रदर्शन जारी
यह ताज़ा हिंसा दिल्ली में कई दिनों से चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी कथित NEET अनियमितताओं के लिए जवाबदेही और पेपर लीक के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर अपडेट पोस्ट करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को अधिकारियों की सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, जबकि विपक्षी नेताओं ने भी जंतर-मंतर के पास पुलिस की कार्रवाई के वीडियो और बयान साझा किए।
हालांकि, पुलिस का कहना था कि वे ज़मीनी स्तर पर हिंसा का जवाब दे रहे थे और राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम कर रहे थे। देर रात तक जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस इलाके में सुरक्षा कड़ी रही और किसी भी और झड़प को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए। अधिकारियों ने कहा कि रात भर स्थिति पर नज़र रखी जाएगी।
सन्नाटे में तब्दील हुई दिल्ली: एडवाइजरी जारी, रात भर रहेगा कड़ा पहरा
इस भारी अशांति का सीधा असर दिल्ली की धड़कन कहे जाने वाले कनॉट प्लेस और जनपथ के ट्रैफिक पर पड़ा। चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और दिल्ली मेट्रो को भी सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए अपनी सेवाएं रोकनी पड़ीं। बाजार बंद कर दिए गए और चारों तरफ सिर्फ सायरन की आवाजें गूंजती रहीं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कई FIR दर्ज की जा रही हैं। देर रात तक पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए रात भर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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