
पश्चिम बंगाल के मालदा से आई एक खबर ने देशभर को चौंका दिया है। आम तौर पर हम चुनाव या वोटर लिस्ट सुधार जैसे काम को एक साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया मानते हैं, लेकिन इस बार मामला इतना बढ़ गया कि न्यायिक अधिकारियों को ही भीड़ ने घेर लिया। सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं है, बल्कि यह है कि क्या देश की न्यायिक प्रक्रिया अब सुरक्षित है? इस पूरे मामले के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने TMC पर जमकर निशाना साधा है।
मामला पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक-II ब्लॉक का है। यहां सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वोटर लिस्ट की जांच और सुधार (Special Intensive Revision - SIR) का काम चल रहा था। इस काम की जिम्मेदारी सात न्यायिक अधिकारियों को दी गई थी, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं।
1 अप्रैल को दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच अचानक एक उग्र भीड़ ने दफ्तर को घेर लिया। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अधिकारियों को अंदर ही बंधक बना लिया गया। करीब 9 घंटे तक ये अधिकारी वहीं फंसे रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें न खाना मिला और न ही पानी।
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स्थिति सिर्फ बंधक बनाने तक सीमित नहीं रही।
आखिरकार, देर रात करीब 1 बजे भारी पुलिस बल की मदद से सभी अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने इसे सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को रोकने की “सोची-समझी साजिश” बताया।
कोर्ट ने:
यह साफ संकेत है कि मामला अब सिर्फ राज्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का बन चुका है।
इस घटना के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। गौरव भाटिया ने कहा कि स्वतंत्र भारत में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कानूनी प्रक्रिया को रोका गया हो। स्मृति ईरानी ने TMC पर निशाना साधते हुए कहा कि “हिंसा और टीएमसी अब एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं।” वहीं रवि किशन ने दावा किया कि बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार हिंसा होती रही है और सुरक्षा नहीं दी जाती।
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि वोटर लिस्ट से “जानबूझकर खास वर्ग के लोगों के नाम हटाने” की कोशिश की जा रही है, जिससे लोगों में गुस्सा है।
मालदा की यह घटना सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। यह देश की न्याय व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई और जांच एजेंसी के फैसले पर टिकी है।
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