
Mecca Mosque Kiss Row: सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद में कथित तौर पर अनैतिक कृत्य (Kiss) करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों (युवक-युवती) को 14 अक्टूबर को फांसी दे दी गई। रिपोर्ट्स से मुताबिक, यह सजा ताजीर के तहत दी गई है। इस घटना के बाद से ही बांग्लादेश में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि दोनों को मौत की सजा क्यों दी गई? क्या उनका अपराध इतना बड़ा था। क्या उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिला था।
इस्लामी कानून में सजा की तीन प्रमुख श्रेणियां बताई जाती हैं।
क़िसास (Qisas): हत्या या शारीरिक चोट जैसे मामलों में प्रतिशोध या उसके बदले मुआवजे से संबंधित व्यवस्था।
हुदूद (Hudud): कुछ विशेष अपराधों के लिए धार्मिक कानून में निर्धारित सजाएं।
ताज़ीर (Tazir): ऐसे अपराधों के लिए सजा, जिनमें सजा तय करने का अधिकार न्यायिक विवेक के अंतर्गत आता है।
कुछ देशों में ताज़ीर के तहत गंभीर अपराधों के लिए मौत की सजा दी गई है। हालांकि, इसकी अनुमति और लागू होने की शर्तें देश के कानून तथा न्यायिक व्याख्या पर निर्भर करती हैं। इस्लामी कानून के विभिन्न विद्वानों के बीच इसकी सीमाओं को लेकर मतभेद भी होते रहे हैं।
नज़रुल के पिता ने कहा कि शीरी अख्तर उनके बेटे की पत्नी नहीं थीं और उनका परिवार उसे जानता भी नहीं था। उन्होंने सुना था कि दोनों एक ही जगह काम करते थे। वहीं, परिवार के एक सदस्य ने बताया कि नज़रुल ने एक बार शीरी के साथ अपने अफेयर की बात कुबूल की थी। हालांकि, दोनों के संबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
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