
दिवाली का त्योहार आते ही गोरखपुर के एक गांव में खास रौनक दिखाई देने लगती है। यहां के लोग हर साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इंतजार करते हैं। वजह है एक ऐसी परंपरा, जो पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। योगी आदित्यनाथ हर दिवाली वनटांगिया समाज के लोगों के बीच पहुंचते हैं और उनके साथ खुशियां बांटते हैं। लेकिन आखिर कौन हैं वनटांगिया समाज के लोग? इनका इतिहास क्या है और क्यों आजादी के बाद भी इन्हें लंबे समय तक बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ा?
वनटांगिया समाज मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और महाराजगंज जिलों के जंगलों में बसा है। इनका जीवन लंबे समय तक जंगलों और पेड़ों की देखभाल से जुड़ा रहा। ब्रिटिश शासन के दौरान इन्हें जंगलों में पेड़ लगाने, उनकी सुरक्षा करने और जमीन पर खेती करने के लिए बसाया गया था। इसी काम से जुड़े परिवार आगे चलकर वनटांगिया कहलाए।
यह भी पढ़ें: ध्यान से देखिए, कहीं भी दिखें ये आतंकी तो पुलिस को दें सूचना, मिलेगा इनाम!
वनटांगिया शब्द का संबंध म्यांमार (तत्कालीन बर्मा) की टांगिया पद्धति से है। इस तकनीक में जंगलों में नए पेड़ लगाए जाते थे और उनके बीच खाली पड़ी जमीन पर खेती भी की जाती थी। रेलवे के लिए बड़े पैमाने पर साखू के पेड़ों की कटाई के बाद अंग्रेजों ने जंगलों को दोबारा विकसित करने के लिए इस पद्धति का इस्तेमाल किया। इसके लिए मजदूर परिवारों को जंगलों में बसाया गया।
देश 1947 में आजाद हो गया, लेकिन वनटांगिया परिवारों की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उनकी बस्तियों को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिला था। इस कारण उन्हें जमीन के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने में मुश्किलें आती थीं। पक्के मकान और बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी लंबे समय तक उनकी पहुंच से बाहर रहीं।
योगी आदित्यनाथ का वनटांगिया समाज से जुड़ाव मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू नहीं हुआ था। गोरखपुर से सांसद और गोरक्षपीठ से जुड़े रहने के दौरान भी वह इन परिवारों के बीच जाते रहे। उनके प्रयासों से वनटांगिया गांवों को राजस्व गांव का दर्जा मिला। इसके बाद लोगों के मतदाता सूची में नाम दर्ज हुए और उन्हें राशन कार्ड समेत दूसरी सरकारी सुविधाओं से जोड़ा गया।
योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले दस वर्षों से हर दिवाली वनटांगिया परिवारों के साथ मनाने की परंपरा जारी रखी है। उन्होंने बताया कि इस समाज के साथ उनका रिश्ता करीब 19-20 कार्यक्रमों का रहा है। उनका कहना है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक खुशियां, अधिकार और सम्मान पहुंचना जरूरी है। यही वजह है कि गोरखपुर के वनटांगिया गांव में उनकी दिवाली एक खास परंपरा बन चुकी है।
यह भी पढ़ें: 10वें दीपोत्सव के बाद अयोध्या में दिखा CM योगी का भक्तिमय अंदाज, रामलला की आरती उतारी
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।