
Hanuman Ansh: सोचिए, आप ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में बैठकर इकोनॉमिक्स का असाइनमेंट बना रहे हों और अचानक एक ऐसा विचार आ जाए जो आपको सीधे भारतीय सिनेमा के बीचों-बीच लाकर खड़ा कर दे! यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ की 21 साल की छात्रा अनुप्रिया नागर के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। अनुप्रिया ने नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित होकर 'हनुमान अंश' नाम की एक फिल्म बनाई। जिस फिल्म ने अपनी रिलीज़ के पहले दिन भारत में महज 10 लाख रुपये का बिज़नेस किया था, उसने देखते ही देखते 99 करोड़+ रुपये से ज़्यादा का कलेक्शन करके सबको हैरान कर दिया।
अनुप्रिया नागर की फिल्म मेकिंग में कोई पुरानी पृष्ठभूमि या बॉलीवुड का पारिवारिक कनेक्शन नहीं रहा है। न ही उन्होंने किसी बड़े फिल्म स्कूल से डिग्री ली। यह सब शुरू हुआ उनकी यूनिवर्सिटी के एक मॉड्यूल से। इन्वेस्टमेंट और बैंकिंग के एक प्रोजेक्ट के दौरान अनुप्रिया मशहूर बिज़नेसमैन स्टीव जॉब्स पर रिसर्च कर रही थीं। इसी रिसर्च में उनका ध्यान स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा के जुड़ाव पर गया। जॉब्स की भारत यात्रा और बाबा के विचारों से अनुप्रिया इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने इस विषय पर पूरी गहराई से काम करने का मन बना लिया।
विषय चुनने के बाद अनुप्रिया और उनकी टीम ने लगभग एक साल तक सिर्फ रिसर्च पर काम किया। वे उन तमाम जगहों पर गए जिनका संबंध नीम करौली बाबा से रहा है। टीम ने चित्रकूट और वृंदावन जैसी पवित्र जगहों का दौरा किया और उन लोगों से मुलाकात की जो कभी बाबा के संपर्क में रहे थे। अनुप्रिया का मुख्य उद्देश्य इस कहानी को दुनिया भर के युवाओं और अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के सामने एक नए अंदाज़ में पेश करना था।
7 अगस्त को जब 'हनुमान अंश' थिएटर्स में आई, तो शुरुआत बेहद सुस्त रही। पहले हफ्ते में फिल्म ने करीब 1.08 करोड़ रुपये कमाए और दूसरे हफ्ते में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 40 लाख रुपये रह गया। लगा कि फिल्म फ्लॉप हो चुकी है, लेकिन असली खेल तीसरे हफ्ते से शुरू हुआ।
करीब 1.8 से 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म की सफलता ने ट्रेड एक्सपर्ट्स को भी चौंका दिया है। हालांकि, बॉक्स-ऑफिस का यह पूरा ग्रॉस कलेक्शन सिर्फ प्रोड्यूसर का मुनाफा नहीं होता, क्योंकि कमाई का बड़ा हिस्सा थिएटर मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच बंटता है।
अनुप्रिया नागर यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर रही हैं। सोशल मीडिया पर वह खुद को Economist, Artist और Film Producer के तौर पर पेश करती हैं। फिल्म निर्माण से पहले भी उनकी रुचि कला में रही है। उन्होंने महज 12 साल की उम्र में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगानी शुरू कर दी थी। यूनिवर्सिटी पहुंचने के बाद भी उनकी यह रुचि बनी रही। वह स्टूडेंट आर्ट, डांस और बिजनेस सोसायटी जैसी गतिविधियों से जुड़ीं। यानी उनका प्रोफाइल सिर्फ इकोनॉमिक्स की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा।
'हनुमान अंश' स्वंभू मीडिया नेटवर्क के बैनर तले बनाई गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फिल्म के प्रोड्यूसर्स में अनुप्रिया नागर, रागिनी एस, नम्रता जी सिंह और फिल्म के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के नाम शामिल हैं। अनुप्रिया की उम्र अभी 21 साल है और यह उनकी पहली फीचर फिल्म बताई जा रही है। इतनी कम उम्र में किसी फीचर फिल्म के प्रोडक्शन से जुड़ना अपने आप में असामान्य है। लेकिन इस कहानी की सबसे खास बात सिर्फ फिल्म की कमाई नहीं है। असली दिलचस्पी इस बात में है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई।
जिस छात्रा ने यूनिवर्सिटी के एक मॉड्यूल के लिए स्टीव जॉब्स पर रिसर्च शुरू की थी, वही रिसर्च आगे चलकर नीम करौली बाबा पर फिल्म बनाने की वजह बनी। यानी 'हनुमान अंश' की कहानी फिल्म सेट से नहीं, बल्कि एक इकोनॉमिक्स क्लास के असाइनमेंट से शुरू हुई। इसके बाद करीब एक साल की रिसर्च, अलग-अलग स्थानों की यात्राएं, लोगों से बातचीत और बाबा के जीवन को समझने की कोशिश ने इस प्रोजेक्ट को फिल्म का रूप दिया। आज 21 साल की अनुप्रिया नागर की पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर 99 करोड़+ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन कर चुकी है। हालांकि इसे सीधे उनका मुनाफा कहना सही नहीं होगा, लेकिन कम बजट वाली इस फिल्म का इतना बड़ा बॉक्स ऑफिस आंकड़ा निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन गया है। 'हनुमान अंश' की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यह सिर्फ एक फिल्म की बॉक्स ऑफिस यात्रा नहीं, बल्कि एक छात्र के अकादमिक प्रोजेक्ट के फीचर फिल्म में बदल जाने की कहानी भी है।
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