
Mumbai Vishakha Raut Membership Cancelled: मुंबई की राजनीति में विशाखा राउत कोई नया नाम नहीं हैं। पूर्व महापौर, पूर्व विधायक और शिवसेना की पुरानी पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहीं राउत को अब बीएमसी की राजनीति में बड़ा झटका लगा है। दादर के वार्ड नंबर 191 से चुनी गई उनकी नगरसेविका की सदस्यता जाति प्रमाणपत्र विवाद के चलते खत्म हो गई है। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें छह साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया है। जानिए विशाखा राउत कौन हैं और आखिर BMC की वरिष्ठ नगरसेविका की सदस्यता क्यों हुई रद्द, पूरी डिटेल।
विशाखा राउत का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। वह 1990 के दशक में बीएमसी की राजनीति में सक्रिय हुईं और 1997 में मुंबई की महापौर बनीं। इसके बाद 1999 में उन्होंने दादर विधानसभा सीट से चुनाव जीता और 2004 तक महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहीं। यानी बीएमसी से लेकर विधानसभा और फिर दोबारा मुंबई की स्थानीय राजनीति तक उनका प्रभाव बना रहा। राउत को शिवसेना के पुराने संगठन और दादर-शिवाजी पार्क इलाके की राजनीति की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता रहा है। 2026 के बीएमसी चुनाव में वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के टिकट पर वार्ड 191 से मैदान में उतरीं।
वार्ड 191 की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी। राउत ने चुनाव लड़ते समय कुणबी जाति का प्रमाणपत्र पेश किया था। जनवरी 2026 में हुए चुनाव में उन्होंने शिवसेना (शिंदे) की उम्मीदवार प्रिया सरवणकर गुरव को बेहद कम अंतर से हराया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक जीत का अंतर सिर्फ 167 वोट था। चुनाव के बाद उनके जाति प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी गई। शिकायत प्रिया सरवणकर की ओर से की गई थी। मामला पालघर जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति के पास पहुंचा।
ये भी पढ़ें- संजय दत्त का मराठी बोलने से इनकार, महाराष्ट्र मंत्री की मांग पर दिया मजेदार जवाब, देखें VIDEO
20 अगस्त 2026 को पालघर की जाति जांच समिति ने राउत का कुणबी जाति प्रमाणपत्र अमान्य कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट में सामने आए रिकॉर्ड के मुताबिक, समिति के फैसले का एक प्रमुख आधार यह था कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास इसे जारी करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था। इसके बाद बीएमसी आयुक्त की ओर से वार्ड 191 से उनका निर्वाचन रद्द होने की प्रक्रिया शुरू हुई। बीएमसी की बैठक में महापौर रितु तावड़े ने सदस्यता समाप्त किए जाने की घोषणा की। यह कार्रवाई 20 अगस्त से प्रभावी मानी गई।
विशाखा राउत ने इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी, लेकिन सितंबर की शुरुआत में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने 1 सितंबर के आदेश के जरिए उन्हें छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य कर दिया। हालांकि, राउत की ओर से जाति प्रमाणपत्र के फैसले के खिलाफ अपील की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसलिए इस पूरे मामले का अंतिम कानूनी निर्णय अभी बाकी है।
ये भी पढ़ें- कौन थीं अश्विनी पोल? कुश्ती में 11 मेडल जीतने वाली पहलवान का करियर और दर्दनाक कहानी
इस मामले ने बीएमसी चुनाव के बाद सामने आ रही कानूनी चुनौतियों को भी चर्चा में ला दिया है। आरटीआई के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक 227 में से 79 निर्वाचित नगरसेवकों के चुनाव को अलग-अलग चुनाव याचिकाओं में चुनौती दी गई है। आरोपों में जाति प्रमाणपत्र, चुनावी हलफनामे में कथित विसंगतियां, आपराधिक मामलों और संपत्ति से जुड़ी जानकारी शामिल हैं। यानी विशाखा राउत का मामला सिर्फ एक नगरसेविका की सदस्यता जाने की कहानी नहीं है। यह इस बात का भी संकेत है कि बीएमसी चुनाव जीतने के बाद भी उम्मीदवारों के सामने कानूनी और दस्तावेजी जांच की बड़ी चुनौती बनी रहती है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।