
Train Linen Theft Viral Video: कई बार भारतीय रेलवे की AC बोगियों में सफर करने वाले कई यात्री तौलिया, चादर या कंबल को मामूली चीज समझकर अपने साथ ले जाते हैं। लेकिन एक वायरल वीडियो ने इस आदत के पीछे छिपी ऐसी सच्चाई सामने रखी है, जिसे जानने के बाद शायद लोग दोबारा ऐसा करने से पहले जरूर सोचें। वीडियो में एक रेलवे कर्मचारी ने बताया कि ट्रेन से गायब होने वाले लिनेन का नुकसान कई बार सीधे उसकी सैलरी से वसूला जाता है। यह वीडियो यूट्यूबर नवीन सिंह ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए लिखा कि रेलवे कर्मचारियों की परेशानी को भी समझना चाहिए और यात्रियों को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए।
वीडियो में रेलवे कर्मचारी अमित यादव बताते हैं कि उनकी ड्यूटी AC कोच में यात्रियों को चादर, तौलिया और कंबल देना और यात्रा खत्म होने के बाद उन्हें वापस इकट्ठा करना है। उनका कहना है कि कई यात्री इस्तेमाल के बाद इन सामानों को वापस नहीं करते और अपने साथ ले जाते हैं। अमित यादव के मुताबिक, जब कोई लिनेन गायब होता है तो कई मामलों में इसकी भरपाई उन्हें अपनी जेब से करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें गायब हुए सामान की वजह से करीब 5,000 रुपये अपनी 14,000 रुपये की सैलरी में से देने पड़े थे। इस घटना के बाद उन्होंने सामान देने का तरीका बदला और ज्यादा सतर्क रहने लगे, लेकिन चोरी की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकीं।
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कर्मचारी ने वीडियो में एक हालिया घटना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, एक यात्री ने पूछा कि तौलिया पहले से क्यों नहीं दिया गया। इस पर उन्होंने बताया कि लगातार हो रही चोरी की वजह से अब जरूरत पड़ने पर ही तौलिया दिया जाता है। हालांकि, बातचीत के बावजूद उस यात्री ने भी कथित तौर पर तौलिया अपने साथ ले लिया। इस घटना से साफ है कि कुछ लोगों की लापरवाही का असर पूरे सिस्टम पर पड़ता है। चोरी रोकने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है, जबकि ईमानदार यात्रियों को भी पहले जैसी सुविधा नहीं मिल पाती। नीचे देखें वायरल वीडियो-
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वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इस व्यवहार की आलोचना की। कई यूजर्स ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को निजी सामान समझकर ले जाना गलत है। कुछ लोगों ने इसे नागरिक जिम्मेदारी की कमी बताया, जबकि कई ने कहा कि ऐसे मामलों में नैतिक शिक्षा और सार्वजनिक जागरूकता दोनों की जरूरत है। लोगों का यह भी कहना है कि रेलवे की सुविधा यात्रियों की सहूलियत के लिए होती है, न कि घर ले जाने के लिए। छोटी लगने वाली ऐसी हरकतें उन कर्मचारियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं, जो सीमित वेतन में अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। इसलिए हर यात्री की जिम्मेदारी है कि वह रेलवे की संपत्ति को सुरक्षित रखे और इस्तेमाल के बाद उसे वहीं वापस छोड़ दे।
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