अमेरिका ने सीरिया में ISIS पर फिर किया हमला लेकिन क्यों? जानें वजह और देखे तबाही की तस्वीरें

Published : Jan 11, 2026, 08:03 AM IST

US Strikes in Syria: ISIS को कमजोर बताए जाने के बावजूद अमेरिका ने सीरिया में फिर हवाई हमले क्यों किए? क्या आतंकी संगठन चुपचाप दोबारा संगठित हो रहा है, या यह सिर्फ एक प्रिवेंटिव स्ट्राइक है? हालिया हमले कई बड़े रणनीतिक सवाल खड़े कर रहे हैं।

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US Strikes On ISIS Syria: संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बार फिर सीरिया में ISIS के ठिकानों पर सैन्य हमले किए हैं। सवाल यह है कि जब ISIS को पहले ही कमजोर बताया जा चुका है, तो अमेरिका को दोबारा बमबारी क्यों करनी पड़ी? क्या सीरिया में फिर से आतंकी संगठन सिर उठा रहा है, या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका की यह कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है।

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अमेरिका ने सीरिया में ISIS को दोबारा निशाना क्यों बनाया?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सीरिया में हाल की राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता का फायदा उठाकर ISIS के बचे हुए लड़ाके फिर से संगठित होने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो ISIS छोटे-छोटे हमलों के जरिए दोबारा बड़ा खतरा बन सकता है। इन्हीं आशंकाओं के चलते अमेरिका ने शनिवार को ISIS ठिकानों पर नए हमले किए।

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19 दिसंबर के बाद यह दूसरा हमला क्यों अहम है?

यह हमला 19 दिसंबर के बाद सीरिया पर दूसरा अमेरिकी सैन्य हमला है। इससे पहले, दो अमेरिकी सैनिकों और उनके दुभाषिए की एक ISIS हमले में मौत हो गई थी। उसी घटना के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू की थी। अब यह दूसरा हमला बताता है कि अमेरिका इस मुद्दे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

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ऑपरेशन “हॉकआई स्ट्राइक” क्या था और क्यों चर्चा में रहा?

19 दिसंबर 2025 को शुरू किया गया ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक अमेरिका का एक बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान था। इस ऑपरेशन में मध्य और पूर्वी सीरिया में 70 से ज्यादा ISIS ठिकानों को निशाना बनाया गया। दीर एज़-ज़ोर, रक्का और होम्स जैसे इलाके इसके मुख्य टारगेट थे। इसमें लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर, HIMARS सिस्टम और सहयोगी देशों की मदद ली गई थी।

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ट्रंप ने इन हमलों को लेकर क्या कहा था?

तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक को “विशाल” और “बेहद सफल” बताया था। उन्होंने साफ कहा था कि अमेरिकी सेना पर हमला करने वालों को कड़ा जवाब मिलेगा। रक्षा मंत्रालय ने भी इसे ISIS के लिए सख्त चेतावनी बताया।

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क्या ISIS अब भी उतना ही खतरनाक है?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ISIS अब बड़े इलाके पर नियंत्रण नहीं रखता, लेकिन इसका खतरा खत्म नहीं हुआ है। यह संगठन अब छोटे-छोटे ग्रुप में काम कर रहा है और मौका मिलते ही हमले करने की फिराक में रहता है। इसी वजह से अमेरिका सीरिया में करीब 1,000 सैनिकों को तैनात किए हुए है।

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आगे अमेरिका की रणनीति क्या होगी?

अमेरिका स्थानीय बलों, खासकर सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF), के साथ मिलकर गश्त, खुफिया जानकारी जुटाने और टारगेटेड हमले जारी रखेगा। पेंटागन का साफ संदेश है—ISIS को दोबारा उभरने का कोई मौका नहीं दिया जाएगा।

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क्या यह बड़े संघर्ष का संकेत है?

फिलहाल अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये हमले किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि एक सतत आतंकवाद विरोधी रणनीति का हिस्सा हैं। लेकिन मध्य पूर्व की अस्थिरता को देखते हुए हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका किसी भी हाल में आतंकियों को दोबारा पैर जमाने का मौका नहीं देना चाहता और यही इन हमलों की सबसे बड़ी वजह है।

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