
नई दिल्ली: 'विकसित भारत' का सपना कैसे साकार हो? इसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए देश के सांसद और विधायक एक साथ एक मंच पर आए। मौका था नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (NFPRC) की तरफ से गुरुवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर में रखी गई एक खास वर्कशॉप का। इस वर्कशॉप में सबूतों के आधार पर नीतियां बनाने, मजदूरों को फॉर्मल सिस्टम में लाने, सामाजिक सुरक्षा, स्किल डेवलपमेंट और जनता से बेहतर संवाद कायम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
NFPRC के प्रमुख तरुण चुघ, हरविंदर कल्याण और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि नए लेबर कोड, ई-श्रम और स्किल इंडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जनप्रतिनिधियों के लिए डिजिटल संवाद और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करना बेहद अहम है। इस वर्कशॉप में 70 सांसदों और विधायकों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने "सबके लिए सामाजिक सुरक्षा और मजदूरों का फॉर्मलाइजेशन: नया लेबर ढांचा" विषय पर एक खास सेशन लिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे नए लेबर कोड, ई-श्रम पोर्टल, नेशनल करियर सर्विस (NCS) और डिजिटल लेबर चौक जैसी पहल देश के असंगठित और गिग वर्कर्स की जिंदगी को बेहतर बना रही हैं।
राज्यसभा सांसद विनोद तावड़े ने विधायकों को असरदार तरीके से अपनी बात रखने, सोशल मीडिया संभालने और फेक न्यूज से निपटने के तरीकों पर ट्रेनिंग दी। वहीं, NSDC के सीईओ श्री अरुणकुमार पिल्लई ने बताया कि 'स्किल इंडिया डिजिटल' इकोसिस्टम के जरिए भविष्य के लिए एक स्किल्ड वर्कफोर्स कैसे तैयार की जा रही है। आखिर में, NFPRC के बोर्ड मेंबर डॉ. अभिनव प्रकाश ने सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम का समापन डिजिटल बदलाव और नागरिक-केंद्रित शासन के साझा नजरिए के साथ हुआ।
वर्कशॉप की शुरुआत में NFPRC फाउंडेशन के अध्यक्ष तरुण चुघ ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि 'विकसित भारत @2047' का लक्ष्य हासिल करने के लिए मजदूरों को फॉर्मल सिस्टम में लाना, उन्हें रोजगार के लिए तैयार करना और डिजिटल स्किल डेवलपमेंट पर जोर देना होगा।
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