
उत्तर प्रदेश अब केवल देश की आंतरिक विकास गाथा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक साझेदारियों का भी मजबूत केंद्र बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जापान के यामानाशी प्रान्त के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडोरा के नेतृत्व में आए आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की। सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस मुलाकात में भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी, स्वच्छ ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, अनुशासन, नवाचार और सतत विकास जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश इस वैश्विक सहयोग को जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
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बैठक के दौरान वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रान्त के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। यह एमओयू स्वच्छ ऊर्जा, विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, नवाचार, क्षमता निर्माण और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है। दोनों पक्षों ने इस समझौते को भविष्य की साझेदारी की नींव बताते हुए इसके ठोस परिणामों पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के माध्यम से निवेशकों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी यूपीनेडा को सौंपी गई है।
बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन पायलट परियोजना के वाणिज्यिक संचालन की शुरुआत को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया। जापानी प्रतिनिधिमंडल ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार की पहलों की सराहना करते हुए भविष्य में सहयोग को और विस्तार देने की इच्छा जताई।
इस अवसर पर भारत और जापान के गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से बौद्ध विरासत और बौद्ध पर्यटन सर्किट के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने की संभावनाओं पर सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान न केवल आपसी समझ को गहरा करता है, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी को भी मजबूती देता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त के बीच यह सहयोग आने वाले समय में और सशक्त होगा। ग्रीन एनर्जी, औद्योगिक विकास, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में यह साझेदारी न केवल प्रदेश, बल्कि भारत-जापान संबंधों को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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