योगी सरकार की वैज्ञानिक रणनीति से मीरजापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत की कमी आई है। लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप, आधुनिक अरेस्टर और व्यापक जागरूकता अभियान ने जिले को देश का मॉडल बना दिया है।

बरसात के मौसम में आसमान से गिरती बिजली वर्षों तक मीरजापुर के लिए सबसे बड़ा जानलेवा खतरा रही है। पथरीली जमीन, खनन गतिविधियां और विशिष्ट भौगोलिक संरचना के कारण यह जिला देश के सबसे अधिक वज्रपात प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और जन-जागरूकता के समन्वय से ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसने मीरजापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक घटा दिया है।

प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि रोकना योगी सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों को हर हाल में न्यूनतम किया जाए। इसी नीति के तहत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) को तकनीकी रूप से सशक्त किया गया। मीरजापुर में लागू किया गया “लाइटनिंग रेज़िलिएंसी मॉडल” इसी दूरदर्शी नीति का ठोस परिणाम है, जो अब अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहा है।

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आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं सफलता की कहानी

डीडीएमए मीरजापुर के अध्यक्ष एवं जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार के अनुसार, बीते वर्षों में वज्रपात से होने वाली मौतों के आंकड़े चिंताजनक थे।

  • वर्ष 2019 में 30 मौतें
  • वर्ष 2020 में 28 मौतें
  • वर्ष 2021 में 23 मौतें
  • वर्ष 2022 में 30 मौतें

वहीं, लाइटनिंग मिटिगेशन प्रोजेक्ट लागू होने के बाद वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अब तक यह संख्या घटकर 14 रह गई है। यह कमी किसी संयोग का नहीं, बल्कि सुनियोजित और वैज्ञानिक हस्तक्षेप का नतीजा है।

वैज्ञानिक अध्ययन से चिन्हित हुए ‘लाइटनिंग हॉटस्पॉट’

योगी सरकार के निर्देश पर मीरजापुर में पिछले चार से पांच वर्षों के वज्रपात आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लखनऊ के प्रोजेक्ट इवैल्यूएशन, IITM पुणे के स्थलीय डेटा, IIT रुड़की से जुड़े विशेषज्ञों के शोध और CROPC द्वारा किए गए संवेदनशीलता आकलन को शामिल किया गया। अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश मौतें खुले खेतों, पेड़ों के नीचे, जल स्रोतों के आसपास और कच्चे मकानों में होती हैं। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर मीरजापुर का विस्तृत “लाइटनिंग हॉटस्पॉट मैप” तैयार किया गया।

80 संवेदनशील स्थानों पर लगे आधुनिक लाइटनिंग अरेस्टर

हॉटस्पॉट मैप के आधार पर पहले चरण में जिले के अत्यंत संवेदनशील 80 स्थानों पर अर्ली स्ट्रीमर एमिशन (ESE) तकनीक आधारित लाइटनिंग अरेस्टर लगाए गए। ये अत्याधुनिक उपकरण आकाशीय बिजली को सुरक्षित रूप से धरती में प्रवाहित कर देते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्र में जान-माल का नुकसान नहीं होता। कई अरेस्टरों में लगे इंडिकेटर यह प्रमाणित कर चुके हैं कि वे कई बार बिजली को सफलतापूर्वक अवशोषित कर चुके हैं।

तकनीक के साथ-साथ जन-जागरूकता पर भी जोर

योगी सरकार की रणनीति केवल उपकरण लगाने तक सीमित नहीं रही। पूरे जिले में ‘वज्रपात सुरक्षा कार्यक्रम’ चलाया गया, जिसके तहत ब्लॉक, जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण आयोजित किए गए। ग्राम प्रधानों, लेखपालों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों को यह बताया गया कि बिजली गिरने के दौरान क्या करें और क्या न करें।

‘दामिनी’ मोबाइल ऐप के जरिए समय से चेतावनी पाने का प्रशिक्षण दिया गया। मीरजापुर की सभी 809 ग्राम पंचायतों में माइकिंग, जागरूकता रथ, पोस्टर, वीडियो और पंचायत स्तरीय कार्यशालाओं के माध्यम से संदेश पहुंचाया गया। यहां तक कि सिनेमा हॉलों में भी बिजली से बचाव पर आधारित वीडियो दिखाए गए। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए IMD की चेतावनियां तेजी से आमजन तक पहुंचाई गईं।

शून्य मौतों के लक्ष्य की ओर मीरजापुर

इन समन्वित प्रयासों का परिणाम यह है कि मीरजापुर में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। अब सरकार का लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य पर लाना है। योगी सरकार का यह लाइटनिंग रेज़िलिएंसी मॉडल यह साबित करता है कि यदि नीति, विज्ञान और जनभागीदारी एक साथ काम करें, तो प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनहानि को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। मीरजापुर आज सिर्फ सुरक्षित नहीं हो रहा, बल्कि देश को रास्ता भी दिखा रहा है।

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