
लखनऊ। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डाटा सेंटर की स्थापना और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक दौर में डाटा नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भविष्य में “न्यू ऑयल” की भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में एक भी डाटा सेंटर नहीं था, लेकिन अब सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। कई डाटा सेंटर स्थापित हो चुके हैं और कई प्रस्तावित हैं। सरकार इन्हें क्लस्टर के रूप में विकसित कर मजबूत डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।
डाटा सेंटर का काम डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखना, उसकी प्रोसेसिंग करना और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना है। इससे शासन की कार्यक्षमता और पारदर्शिता बढ़ेगी। इसी उद्देश्य से स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी को सुप्रीम रेगुलेटर और आर्किटेक्ट के रूप में विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कई विभाग एक ही विषय पर अलग-अलग आंकड़े पेश करते थे, जिससे नीति निर्माण में दिक्कत आती थी। अब सरकार एकीकृत और प्रमाणिक डाटा सिस्टम पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अब “समस्या के बाद समाधान” की जगह “पहले से अनुमान और रणनीति” की दिशा में काम होगा। डाटा विश्लेषण के आधार पर संभावित चुनौतियों का आकलन कर पहले से योजना बनाई जाएगी। “सबका साथ, सबका विकास” के लक्ष्य को हासिल करने में डाटा की अहम भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी विभिन्न विभागों का डाटा एकत्र कर उसे एकीकृत करेगी और नीति निर्माण में उसका उपयोग सुनिश्चित करेगी। डाटा को सही तरीके से जोड़ने और समझने में “क्रिटिकल थिंकिंग” गेम चेंजर साबित होगी। डाटा आधारित प्रशासन से पारदर्शिता, दक्षता और भविष्य उन्मुख नीति निर्माण को मजबूती मिलेगी। इससे उत्तर प्रदेश एआई आधारित अर्थव्यवस्था और डिजिटल गवर्नेंस में नई ऊंचाई हासिल करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से हर साल 1200-1500 बच्चों की मौत होती थी। इलाज की व्यवस्था कमजोर थी और बीमारी की जड़ तक पहुंचने का प्रयास नहीं हुआ था। सरकार ने वर्ष 2017 के बाद व्यापक डाटा एकत्र किया और विश्लेषण किया कि मरीज किन क्षेत्रों से आ रहे हैं और कारण क्या हैं। पता चला कि जिन इलाकों में शुद्ध पेयजल और शौचालय की कमी थी, वहां मौतें अधिक थीं।
इसके बाद सरकार ने अस्पतालों को मजबूत करने के साथ-साथ शुद्ध पेयजल और शौचालय निर्माण पर विशेष ध्यान दिया। यह एक प्रोएक्टिव और यूनिवर्सल अप्रोच थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद इंसेफेलाइटिस प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है और अब बच्चों की मौत नहीं हो रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाएं बिना भेदभाव सभी तक पहुंचनी चाहिए। शासन का दायित्व है कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को जातीय आधार पर बांटने की राजनीति ने प्रदेश को नुकसान पहुंचाया। उनकी सरकार सर्वसमावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना की घोषणा करते हुए कहा कि 8000 न्याय पंचायतों में डिजिटल उद्यमी चुने जाएंगे। इनमें 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। प्रत्येक को 10 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा। ये उद्यमी गांवों में डिजिटल सुविधाएं, ऑप्टिकल फाइबर आधारित सेवाएं और ऑनलाइन ट्रेडिंग को बढ़ावा देंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
सीएम योगी ने ‘महिला उद्यमी उत्पाद विपणन केंद्र’ योजना की घोषणा की। प्रदेश में लगभग एक करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उनके उत्पादों की बिक्री के लिए न्याय पंचायत स्तर पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाएंगे। इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना डिजिटल इंटरप्रेन्योर योजना से जुड़ी होगी और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर पहले अधिक थी। अब प्रतिवर्ष 60 लाख सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इनपैनल्ड अस्पतालों में भी सुविधा और प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि मातृत्व और बचपन सुरक्षित रह सके।
मुख्यमंत्री ने कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन की घोषणा करते हुए कहा कि यूपी के किसानों के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि 16 लाख ट्यूबवेल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिस पर सरकार हर साल लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
साथ ही, जिन ट्यूबवेल में किसान डीजल से सिंचाई करते हैं, उन्हें सोलर पैनल देने के लिए 2000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। बाणसागर, अर्जुन सहायक, सरयू नहर और मध्य गंगा परियोजना के माध्यम से सिंचाई क्षमता का विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़कर कृषि क्षेत्र को मजबूत बना रही है।
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