योगी सरकार का ग्रामीण रोजगार मॉडल, 94 इकाइयों से 2,586 को रोजगार

Published : Jan 13, 2026, 11:49 PM IST
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सार

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना 2025–26 में तेज प्रगति पर है। अब तक 94 इकाइयों की स्थापना से ₹648.63 लाख का निवेश हुआ और 2,586 युवाओं को रोजगार मिला। योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की प्राथमिकताओं में ग्रामीण रोजगार सृजन और ग्रामीण औद्योगिकीकरण सबसे ऊपर है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना वित्तीय वर्ष 2025-26 में तेज गति से आगे बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष के अब तक के आंकड़े बताते हैं कि योजना ने मजबूत प्रगति दर्ज की है और आने वाले महीनों में इसके लक्ष्य और तेजी से पूरे होने की उम्मीद है।

94 इकाइयों की स्थापना, ₹648.63 लाख का निवेश

वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक इस योजना के अंतर्गत 94 ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है। इसके माध्यम से ₹648.63 लाख का पूंजी निवेश संभव हुआ है। इन इकाइयों से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 2,586 युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो रही है।

गांव में ही रोजगार, शहरों की ओर पलायन पर रोक

मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में ही उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार देना है। इससे युवाओं को काम के लिए शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षित और तकनीकी रूप से योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों को उद्यम शुरू करने के लिए ₹10 लाख तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

ब्याज सब्सिडी से उद्यमियों को बड़ी राहत

योगी सरकार ने इस योजना में ब्याज सब्सिडी की आकर्षक व्यवस्था की है। सामान्य वर्ग के उद्यमियों के लिए 4 प्रतिशत से अधिक ब्याज सरकार वहन करती है। आरक्षित वर्ग के उद्यमियों का पूरा ब्याज सरकार द्वारा दिया जाता है। इस व्यवस्था से युवाओं को बिना वित्तीय दबाव के अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल रहा है।

जिला स्तरीय टास्क फोर्स से होता है चयन

योजना में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के पुरुष एवं महिला उद्यमी आवेदन के पात्र हैं। चयन प्रक्रिया जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय टास्क फोर्स के माध्यम से की जाती है। परियोजना लागत में सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान देना होता है। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक युवाओं को योजना से जोड़कर स्व-रोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाए।

ग्रामीण विकास का योगी मॉडल

योगी सरकार का मानना है कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, बिजली और पानी तक सीमित नहीं होना चाहिए। सरकार गांवों में उद्योगों का नेटवर्क, पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पकारों का सशक्तिकरण, महिला उद्यमिता और स्थायी रोजगार सृजन पर समान रूप से काम कर रही है।

सरकार की सोच स्पष्ट है- 'गांव मजबूत होंगे, तभी प्रदेश मजबूत बनेगा।' इसी दृष्टिकोण के साथ मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है।

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