
अहमदाबाद, गुजरात के मोरबी में सस्पेंशन ब्रिज टूटने से कई हसंते-खेलते परिवार हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो गए। सैंकड़ों लोग मौज-मस्ती करने के लिए पुल पर पहुंचे और देखते ही देखते लाश बनकर घर लौटे। अब तक 135 लोगों की मौत हो चुकी है। तीन दिन होने के बाद भी कइयों के माता-पिता जिंदा या मुर्दा तक नहीं मिले हैं। मोरबी की हर गली-मोहल्ले में चीखों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। वो लोग किस्मत वाले हैं जो इस भयानक मंजर से जिंदा बच गए। एक ऐसे ही परिवार की कहानी सामने आई है, जो हादसे से ठीक पहले ब्रिज से उतर गए और वो सलामत हैं। पूरी फैमिली को जिंदा बचाने में उनके 9 साल के बेटे का चमत्कार है, जिसने रोकर अपने माता-पिता को बचा लिया। आइए जानते हैं कैसे हुआ ये चमत्करा!
बेटा रोया और जिंदा बच गया पूरा परिवार
दरअसल, गुजरात के अमरेली में रहने वाले सागर मेहता अपने परिवार के साथ छुट्टी के दिन होने के कारण से ब्रिज पर घूमने गए थे। सागर ने बताया कि हम हादसे से आधे घंटे पहले ही वहां पहुंचे थे। जैसे ही हम पुल पर चढ़े तो मेरा बेटा नेत्र पुल के हिलने के डर गया और रोने लगा। उसे काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन वो चुप नहीं हुआ। हालांकि हमने पूरे परिवार के साथ ब्रिज पर सेल्फी ली, फिर बेटे की जिद के चलते हम नीचे उतर गए और कहीं और घूमने चले गए।
पूरी जिदंगी नहीं भूल पाएंगे ये सेल्फी
सागर ने ब्रिज से उतरते ही उस पर अपने परिवार के साथ ली सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। जम मेरे दोस्तों और रिश्तेदारों ने हादसे वाली खबर टीवी पर देखी और मेरी फोटोज देखकर मुझे फोन किया। उस दस मिनट में मेर पास कम से कम 50 कॉल आए, सभी ने पूछा कहां हो सलामत हो सब ठीक है कि नहीं। तभी हमें पता चला कि यह हादसा हो गया। हम जिंदगीभर इस सेल्फी को नहीं भूल पाएंगे।
वो नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था
सागर मेहता ने बताया कि हमें पुलिस से उतरे हुए महज 10 ही मिनट हुए थे कि सूचना मिली की ब्रिज टूट गया। लोग चीख-पुकार सुनकर वहां पहुंचे तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। क्योंकि जितने भी लोग पुलिस मौजूद थे सभी मच्छू नदी में गिर गए। कुछ तो तैरकर ऊपर आ गए, लेकिन सैकड़ों लोग मदद की गुहार लगाते हुए बिलखते रहे। वो नजारा हम सभी के लिए रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
जानिए कब और कैसे टूटा मोरबी ब्रिज
बता दें कि मोरबी ब्रिज पिछले 6 महीने से बंद था और उसके रिनोवेशन का काम चल रहा था। जिसके चलते इसे बंद कर दिया गया था। लेकिन कुछ दिन पहले ही 25 अक्टूबर को दिवाली के मौके पर इसे आम लोगों के लिए खोला गया था। पुलिस की शुरूआती जांच में सामने आया है ब्रिज की कुल क्षमता डेढ़ सौ से दो सौ लोगों का भार सहन करने की थी। लेकिन दिवाली होने के कारण इस पर 500 से 600 लोग उस पर पहुंच गए। तभी पुल हिलते हुए टूट गया और नदी में समा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि रविवार को छुट्टी का दिन होने से सस्पेंशन ब्रिज पर क्षमता से अधिक लोग जमा हो गए थे। लेकिन सवाल यह उठता है कि उन्हों रोका क्यों नहीं गया। हालांकि कुछ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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