2 साल से हाई कोर्ट में चल रहे केस को बच्ची ने 2 मिनट में सुलझाया

Published : Jul 19, 2019, 07:32 PM IST
2 साल से हाई कोर्ट में चल रहे केस को बच्ची ने 2 मिनट में सुलझाया

सार

बच्ची की मां की हो गई थी मृत्यु, दहेज हत्या के आरोप में जेल में है पिता। मां की मौत के बाद मासूम की कस्टडी के लिए उसकी नानी और दादी के बीच था विवाद। 

जोधपुर: जिस केस को हाई कोर्ट 2 साल से नहीं सुलझा पा रहा था उस केस को एक बच्ची ने 2 मिनट में ही सुलझा दिया। मामला बच्ची की कस्टडी से जुड़ा हुआ है। घटना जोधपुर बिलाड़ा की है जहां दो वर्षीय मासूम की मां की मौत हो चुकी है और पिता दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद है। इसी के चलते बच्ची की कस्टडी को लेकर उसकी दादी और नानी में विवाद हो गया कि बच्ची किसके पास रहेगी। जब मामला खुद के स्तर पर नहीं निपटा तो  बच्ची की नानी कोर्ट पहुंच गई। याचिका की सुनवाई के दौरान पहले तो नानी ने गार्जियनशिप के लिए निचली अदालत में गुहार लगाई। जब मामला वहां भी नहीं सुलझा तो उन्होनें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता जमना देवी की बेटी प्रियंका की शादी बिलाड़ा क्षेत्र के जितेंद्र जाट से हुई थी। उससे एक दो वर्षीय बच्ची कुकू भी है। कुछ समय बाद ससुराल में दहेज उत्पीड़न के मामले में  प्रियंका की मृत्यु हो गई थी। तब से मासूम कुकू दादा-दादी के पास ही रह रही है। नानी जमनादेवी ने बच्ची की कस्टडी के लिए जब उसकी दादी से आग्रह किया तो उन्हें मना कर दिया गया। 

नानी को देखकर फुले नहीं समायी कुकू 

गुरुवार को कुकू दादी के साथ कोर्ट आई। जब मामले की सुनवाई की बारी आई तो दादी अपनी पोती को गोद में लेकर डायस पर खड़ी हो गई। दूसरी ओर नानी जमनादेवी खड़ी थी। कोर्ट ने मौखिक रूप से सुनवाई से मना करते हुए कहा कि मामले को ट्रायल कोर्ट में निर्णीत करवाएं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अब इतना समय हो गया है बच्ची आपके पास नहीं आएगी। इसपर कुकू की नानी बोली- ऐसा नहीं है साब, बच्ची आएगी। जैसे ही बच्ची ने अपनी नानी को देखा उसकी तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो उनके पास जाने के लिए दादी की गोद से नीचे झूल गई। बच्ची के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। कोर्ट में मौजूद वकील भी यह देख कर  हैरान रह गए। थोड़ी देर बाद जब दादी ने बच्ची को वापस लेने की कोशिश की तो वह नहीं गयी। कोर्ट ने समझ लिया कि बच्ची अपनी नानी के पास खुश है। जस्टिस संदीप मेहता व अभय चतुर्वेदी ने मानवीय गुणों को ऑब्जर्व करते हुए मौखिक रूप से कहा कि इस केस का फैसला तो खुद बच्ची ने ही तय कर दीया है।

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