भारतीय सेना ने रचा इतिहास: 22 साल बाद स्वदेशी लड़ाकू विमान बेड़े में शामिल, हैरान करने वाली क्षमता से हैं लैस

Published : Oct 03, 2022, 01:06 PM ISTUpdated : Oct 03, 2022, 01:07 PM IST
भारतीय सेना ने रचा इतिहास: 22 साल बाद स्वदेशी लड़ाकू विमान बेड़े में शामिल, हैरान करने वाली क्षमता से हैं लैस

सार

राजस्थान के जोधपुर एयर बेस से  भारत में बने स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टर का उद्घाटन किया जाएगा। इसका शुभारंभ देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। यह लड़ाकू विमान 22 सालों की मेहनत के बाद बनकर तैयार हुआ है। यह 1 मिनट में 750 दुश्मनों को मार गिराने की क्षमता रखता है।

जोधपुर. सैन्य क्षेत्र में आज एक बार फिर भारत ने नया इतिहास रच दिया है। दरअसल आज भारत की सेना में 22 साल में बनकर तैयार हुए हल्के लड़ाकू विमान LCH को शामिल किया गया है। स्वदेशी होने के साथ-साथ यह लड़ाकू विमान इतना खतरनाक है कि महज 1 मिनट में 750 गोलियां मार सकता है। जोधपुर एयर बेस पर इसका शुभारंभ कार्यक्रम रखा गया है। जिसे संबोधित करने के लिए देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह खुद जोधपुर पहुंचे हैं। आज फिलहाल तीन लड़ाकू विमान ही सेना के बेड़े में शामिल हुए हैं। अन्य 7 लड़ाकू विमान भी जल्द ही सेना के बेड़े में शामिल होंगे। भारत में बेंगलुरु में यह 15 लड़ाकू विमान बने हैं। जिनकी लागत करीब 4 हजार करोड़ रुपए के लगभग है।

दुर्गाअष्टमी के दिन किया उद्घाटन
आज दुर्गाअष्टमी के दिन राजनाथ सिंह ने सभी धर्मो के धर्मगुरुओं की मौजूदगी में इन लड़ाकू विमान का शुभारंभ किया है। राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा है कि इन लड़ाकू विमानों की शुरुआत के लिए राजस्थान से अच्छी जगह कोई भी नहीं हो सकती। इस वीरों की धरती से आज यह शुरुआत हुई है। यह विमान भारत का विजय रथ है। जिसके सेना के बेड़े में शामिल होने से भारत अब अपने ताकत के नए आयाम रचेगा। सेना में शामिल करने से पहले इन लड़ाकू विमानों को सियाचिन से लेकर रेगिस्तान के धोरों तक के क्षेत्र में उड़ाया गया। जिसके बाद आज उन्हें सेना में शामिल किया गया है।

कारगिल युद्ध के बाद से विचार था, ऐसे हेलीकॉप्टर बनाने का 
दरअसल 1999 में कारगिल युद्ध में करीब 40 दिन से भी ज्यादा समय तक भारतीय सेना ने अपने पोस्टों से पाकिस्तानी सेना को हटाने के लिए काफी संघर्ष किया। उस दौरान  सेना को कमी महसूस हुई थी हमारे पास ऐसा भी लड़ाकू विमान होना चाहिए जो कि हवा में उड़ान भरकर दूसरे देशों की सेना के बंकर और सैनिकों को धाराशायी कर सके। इसके बाद से साल 2000 में सेना ने HAL ने इसे बनाने के लिए बात कही पूर्णविराम जिसके बाद करीब 22 सालों में इसके मैन्युफैक्चरिंग से लेकर टेस्टिंग तक का काम हुआ।

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