पाकिस्तान सीमा पर क्यों गरजे राफेल, सुखोई और तेजस...क्या है पूरा माजरा कि फ्रांस के अधिकारी भी पहुंचे राजस्थान

Published : Nov 08, 2022, 06:20 PM IST
पाकिस्तान सीमा पर क्यों गरजे राफेल, सुखोई और तेजस...क्या है पूरा माजरा कि फ्रांस के अधिकारी भी पहुंचे राजस्थान

सार

 राजस्थान के जोधपुर में भारतीय वायु सेनाओं के साथ फ्रांस के वायुसेना अधिकारियों ने उड़ाए लड़ाकू विमान। पाकिस्तानी बॉर्डर पर जमकर गरजे राफेल, तेजस और सुखोई जैसे विमान। दोनो देशों ने एक साथ मिलकर युद्धाभ्यास किया। 12 नवंबर तक चलेगा अभ्यास।

जोधपुर (jodhpur). भारत और फ्रांस के बीच वायु सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास गरुड़ 7 इन दिनों जारी है।  इस युद्धाभ्यास के दौरान आज बॉर्डर के नजदीक जब सुखोई विमानों ने उड़ान भरी तो उनकी गर्जना सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनके फोटो, वीडियो बनाने के लिए सड़कों पर उतर आए। बाद में पता चला कि इन विमानों में भारत और फ्रांस के वायुसेना प्रमुख भी थे। उन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाए और युद्ध का अभ्यास किया। भारत के वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल बी आर चौधरी है और फ्रांस की वायु सेना के प्रमुख जनरल स्टीफन मेले हैं। इन दोनों अधिकारियों के साथ कुल 10 लड़ाकू विमान उड़ाए गए जिनमें दोनों देशों के योद्धा थे। 

दोनो देशों के जवानों ने एक साथ मिलकर उड़ाए लड़ाकू विमान
जोधपुर में यह युद्धाभ्यास जारी है।  इस युद्ध अभ्यास में फ्रांस की वायु सेना के मल्टीरोल टैंकर ट्रांसपोर्ट भी दिखाई दिए। साथ ही A400 विमान ने भी उड़ान भरी।  हवा में ही एक विमान से दूसरे विमान में फ्यूल भरने का प्रदर्शन भी किया गया। दोनों देशों के सेना प्रमुख पायलट की तरह इस उड़ान में शामिल हुए। भारतीय वायुसेना के प्रमुख रफाल विमान में तो पायलट बने तो फ्रांस के सेना प्रमुख सुखोई में पायलट टीम में शामिल रहे। कई घंटों के अभ्यास में सुखोई ,रफाल, तेजस समेत अन्य हवाई जहाजों ने उड़ान भरी थी।

पहले भी हो चुकी है ऐसी ट्रेनिंग
वायुसेना प्रमुख पश्चिमी सीमाओं तक जाकर वापस लौटे। इसी तरह का अभ्यास साल 2014 में भी हुआ था।  यह पांचवे संस्करण का युद्ध अभ्यास था और इस दौरान भी दोनों सेनाओं के प्रमुख अधिकारियों ने अपने पायलटों के साथ को पायलट या क्रू मेंबर बन कर विमानों में उड़ान भरी थी। यह सब कुछ जोधपुर एयर बेस पर चल रहा है।

12 नवंबर तक चलेगी वार प्रेक्टिस
जोधपुर एयरवेज इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां विदेशी सेनाओं के साथ भारतीय सेना  अक्सर युद्ध का अभ्यास करती है।  रेतीले धोरों, पठार और जमीन पर होने वाले इस अभ्यास को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह पूरी तरह से एक कक्षा है । फ्रांस डब्लू से आए जवानों में 220 जवान और अधिकारी शामिल है।  जबकि भारतीय वायुसेना के 250 से ज्यादा जवान और अधिकारी इस युद्ध के अभ्यास में शामिल है।  25 अक्टूबर से शुरू हुआ यह अभ्यास इस महीने 12 नवंबर तक जारी रहेगा। 

 लेकिन आज यह इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि दोनों देशों की भारतीय वायु सेना के सबसे बड़े अधिकारियों ने इस युद्धाभ्यास में शामिल होकर इसकी उपयोगिता और ज्यादा बढ़ा दी।

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