क्यों सबसे अलग है पुष्कर मेला: क्यों आते विदेशी, क्या खरीदें-कैसे पहुंचे और कहां ठहरें, 7 प्वॉइंट में सब डिटेल

Published : Nov 03, 2022, 12:47 PM ISTUpdated : Nov 03, 2022, 12:52 PM IST
क्यों सबसे अलग है पुष्कर मेला: क्यों आते विदेशी, क्या खरीदें-कैसे पहुंचे और कहां ठहरें, 7 प्वॉइंट में सब डिटेल

सार

राजस्थान ही नहीं भारत का सबसे बड़ा और अलग अंदाज के लिए पूरी दुनिया में फेमस पुष्कर मेला का आगाज नवंबर मे महीने हो गया है। पुष्कर मेला राजस्थान का सबसे मशहूर फेस्टिवल है। जहां रेत में सजे-धजे ऊंटों को करतब दिखाते हैं। जिसे देखने के लिए विदेशी तक आते हैं।

अजमेर (राजस्थान). दो साल के बाद पुष्कर मेले की रौनक फिर से बनने लगी है। सीएम अशोक गहलोत ने एक लाख पचास हजार दीपक जलाकर इसका उद्घाटन किया है। इस उद्घाटन के बाद अब मेला अपने शबाब पर है। स्थानीय होटल कारोबारी अनुमान लगा रहे हैं कि इस बार पूरी दुनिया भर से करीब तीस हजार से ज्यादा विदेशी इस मेले में शामिल होने आ सकते हैं। इसकी अच्छी शुरुआत हुई है। पुष्कर का यह मेला दो कारणों से दुनिया में फेमस है पहला कैटल फेयर और दूसरा विदेशी मेहमान...। विदेशी मेहमान ही इस मेले की जान हैं जो कारोबारियों को पूरे साल का मुनाफा इस दस दिन में दे जाते हैं। आपको बताते हैं विदेशी मेहमान और मेले से जुड़ी सात महत्वपर्णू बातें......। 

1. अजमेर से बारह किलोमीटर दूरी पर स्थित पुष्कर सरोवर हिंदुओं के लिए तीर्थ की तरह है। यहीं हर साल दिवाली के बाद आने वाली कार्तिक पूर्णिमा को यह मेला लगता है। इस बार एक नवम्बर से यह शुरु हुआ और नौ नवम्बर तक जारी रहने वाला है। 

2. इस मेले के बारे में पूरी जानकारी हर साल शुरुआत में ही राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग के पोर्टल पर दी जाती है और मेले से जुड़ी तमाम तारीखें भी वहीं साझा की जाती है। 

3. विदेशी मेहमान इस मेले में शामिल होने के लिए ऑन लाइन होटल बुक कराते हैं। पर्यटन विभाग की साइट के अलावा अन्य टूर ऑपरेट करने वाली साइट पर होटलों के पांच से लेकर पंद्रह दिन तक के पैकेज दिए जाते हैं। इस पैकेज में तमाम सुविधाएं दी जाती हैं। पुष्कर और आसपास के इलाके में छोटै बड़े मिलाकर करीब तीन सौ होटल और गेस्ट हाउस हैं। इस बार नब्बे फीसदी से ज्यादा बुक हैं। 

4. विदेशी मेहमानों को ध्यान में रखते हुए ही पर्यटन विभाग मेला आयोजित करता है इसमें राजस्थानी डांस फॉर्म के साथ विदेशी मेहमानों के साथ देसी खेल खेले जाते हैं। इनमें गुल्ला डंडा, खोखो, कबड्डी और यहां तक कि विदेशी मेहमानों को सजा धजाकर दूलहा और दुल्हन बनाने का खेल भी शामिल है। रस्साकशी और मटका दौड़ में तो विदेशी बालाओं का रंग देखने लायक होता है। डेजर्ड सफारी का आनंद भी विदेशी ले सकते हैं। 

5. विदेशी मेहमानों के लिए होटल और चुनिंदा गेस्ट हाउस में भी तैयारियों की जाती है। होटल के अलावा पुष्कर और आपास के क्षेत्र में तीस से ज्यादा इंडस्ट्रीज हैं जो वेस्टर्न क्लोथ, चांदी का सामान और एंटीक बनाते हैं। इन कपड़ों और सामान को विदेशी खरीदार खरीदते हैं। 

6. विदेशी मेहमान जयपुर इंटरनशेनल एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सड़क मार्ग या हवाई मार्ग से होते हुए अजमेर पुष्कर आ सकते हैं। अधिकतर विदेशी मेहमान जयपुर में उतरने के बाद जयपुर की खूबसूरती को निहारने के बाद ही सड़क मार्ग से पुष्कर पहुंचना पसंद करते हैं। 

7. रूसी, अमेरिकी, इटलीवासी सबकी पसंद...। स्थानीय निवासी और गेस्ट हाउस कारोबारी रोहन सिंह का कहना है कि पूरे साल इसी मेले का इंतजार रहता है। अंदाजा लगाएं तो बीस साल के दौरान डेढ़ लाख से भी ज्यादा विदेशी यहां आ चुके हैं। रूस, अमेरिका, इटली, फ्रांस, इजराइल, दुबई हर बड़े देश से विदेशी आते हैं और उनका देसी सत्कार होता है। नहीं भूलने वाली यादें लेकर जाते हैं। हर साल डेढ से दौ सौ करोड़ तक का कारोबार होता रहा है। इस बार और ज्यादा होने की उम्मीद है। हांलाकि इस साल मेले की जो आत्मा है वह नहीं है....। मेले की आत्मा पशु मेला है। लेकिन पशुओं में बीमारी के कारण वे नहीं आए हैं। विदेशी कैमल सफारी जरूर मिस करेंगे। 
 

 

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