भावुक कहानी: मां का शव घर में रखा, बेबस बेटी धरने पर बैठी, पिता जेल में बंद..कौन करेगा अंतिम संस्कार

Published : Sep 04, 2021, 06:06 PM IST
भावुक कहानी: मां का शव घर में रखा, बेबस बेटी धरने पर बैठी, पिता जेल में बंद..कौन करेगा अंतिम संस्कार

सार

राजस्थान के धौलपुर से एक दिल को झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है। जहां एक बेटी अपनी मां का अंतिम संस्कार कराने के लिए धरने पर बैठी है। क्योंकि उसके पिता जेल में बंद हैं, पिता के बिना मां का कैसे होगा।

धौलपुर, राजस्थान के धौलपुर से एक दिल को झकझोर देने वाली कहानी सामने आई है। जहां एक बेटी अपनी मां का अंतिम संस्कार कराने के लिए धरने पर बैठी है। क्योंकि उसके पिता जेल में बंद हैं, पिता के बिना मां का कैसे होगा, इन्हीं मांगो लेकर बच्ची ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से गुहार लगाई है।

10 साल से जेल में बंद हैं पिता
दरअसल, यह कहानी धौलपुर जिले के कौलारी थाना क्षेत्र के परौआ गांव की है। यहां की रहने वाली 16 साल की गिरजा परमार की मां मौत हो गई है। वहीं उसके पिता बंसता परमार पिछले 10 साल से भरतपुर सेवर जेल में बंद हैं। जो जमीन विवाद के चलते हुए एक हत्या के मामले में आजीवन करावास की सजा काट रहे हैं। ऐसे में बेटी जेल प्रशासन और कलेक्टर से गुहार लगा रही है कि उसके पिता को परौल दे दी जाए, जिससे वह पत्नी के अंतिम संस्कार कर सकें।

पिता नहीं आएंगे बाहर तो मां का नहीं होगा अंतिम संस्कार
बता दें कि बेटी शुक्रवार शाम अपनी दर्दभरी कहानी लेकर सेवर जेल प्रशासन के पास पहुंची हुई थी। जब यहां उसकी सुनवाई नहीं हुई तो वह शनिवार सुबह धौलपुर कलेक्टर कार्यालय के गेट के पास जाकर धरने पर बैठ गई। इसके बाद जब मामले की जानकारी कलेक्टर राकेश जायसवाल तो पचा चला तो उन्होंने पीड़िता से मुलाकात की। जहां बेटी ने कहा कि  वह मां का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार करना चाहती है, इसके अनुसार पिता बसंता ही अंतिम संस्कार कर सकते हैं। अगर मेरे पिता  पैरोल पर नहीं आएंगे तो मां का अंतिम संस्कार कौन करेगा। इसलिए आपसे निवेदन है कि मेरी विनती सुन लीजिए सर।

पिता को छुड़ाने के लिए बेटी ने काटे अधिकारियों के चक्कर
पीड़िता की बात सुनते ही कलेक्टर  राकेश जायसवाल ने जिला प्रशासन को आदेश दिए हैं कि बसंता को पैरोल दी जाए। साथ ही पत्नी के अंतिम संस्कार के बाद उसे फिर जेल भेजा जाए।  वहीं बेटी ने कहा कि वह पिता को छुड़ाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रही हूं। लेकिन अब कलेक्टर साहब ने मेरी बात सुनते हुए पिता को पैरोल देने के के आदेश दिए हैं।
 

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