उपभोक्ता कोर्ट का फैसला : ATM फ्रॉड कर खाते से उड़ाए 3.60 लाख, निकासी का मैसेज नहीं आया, अब बैंक लौटाएगा पैसे

Published : Dec 13, 2021, 02:40 PM IST
उपभोक्ता कोर्ट का फैसला : ATM फ्रॉड कर खाते से उड़ाए 3.60 लाख, निकासी का मैसेज नहीं आया, अब बैंक लौटाएगा पैसे

सार

याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि ये सभी दावे बैंक द्वारा शिकायत के सत्यापन या जांच के बिना किए गए थे। बैंक ने न तो ATM का कोई CCTV फुटेज कोर्ट में पेश किया और न ही ATM की कोई लिस्ट जहां से राशि निकाली गई।

जोधपुर : राजस्थान (Rajasthan) में ATM फ्रॉड का शिकार हुए एक शख्स को उपभोक्ता कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मामला जोधपुर (Jodhpur) का है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का एक कस्टमर साइबर क्राइम का शिकार हो गया था। उसके सेविंग अकाउंट से ATM के जरिए ठगों ने 3 लाख 60 हजार रुपए उड़ा दिए थे। इस मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को ये आदेश दिया है कि वे पीड़ित कस्टमर को ब्याज के साथ उसकी पूरी राशि लौटाए। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ब्याज की राशि याचिका की तारीख से भुगतान की तारीख तक का देना होगा।

क्या है मामला
गोविंद लाल शर्मा नाम के एक शख्स ने जिला उपभोक्ता कोर्ट में एक याचिका डाली थी। जिसमें उन्होंने बताया था कि 4 फरवरी 2019 से 12 फरवरी 2019 तक उनके खाते से ATM कार्ड के जरिए हर दिन 40 हजार रुपए करके कुल 3 लाख 60 हजार रुपए निकाल लिए गए। जब ​​उन्हें बैंक से यह जानकारी मिली तो उन्होंने अपने ATM कार्ड की जांच की। कार्ड उनके पास था और पैसे उन्होंने निकाले भी नहीं थे। इतना ही नहीं ATM से निकाले गए पैसे को लेकर बैंक से कोई मैसेज भी नहीं मिला था। 

बैंक से नहीं मिली मदद
इसके बाद पीड़ित शख्स ने बैंक जाकर इसकी शिकायत बैंकिंग लोकपाल को दर्ज कराई। बैंक ने अपनी रिपोर्ट में उनकी शिकायत को निराधार बताया और कहा कि उन्होंने ही अपने ATM कार्ड से पैसे निकाले हैं। इसके साथ ही बैंक ने यह भी कहा कि उनको SMS भी भेजा गया था। पीड़ित शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि ये सभी दावे बैंक द्वारा शिकायत के सत्यापन या जांच के बिना किए गए थे। बैंक ने न तो ATM का कोई CCTV फुटेज कोर्ट में पेश किया और न ही ATM की कोई लिस्ट जहां से राशि निकाली गई। जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

क्या है कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायतों के बावजूद बैंक ने बिना किसी जांच के एक रिपोर्ट पेश की, जो कि धन के ट्रस्टी के रूप में अपने कानूनी और नैतिक कर्तव्यों से मुकरने की कोशिश थी। इसका ग्राहक और इस प्रकार सेवा प्रदान करने में बैंक की घोर लापरवाही का संकेत है। कोर्ट ने बैंक से पीड़ित शख्स को रुपए लौटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि बैंक अगले दो महीने में पूरी राशि कस्टमर को लौटाए। इसके साथ ही ग्राहक को शारीरिक और मानसिक तौर पर परेशान करने के लिए 10 हजार और कोर्ट के खर्च के लिए 5 हजार रुपए देने का भी आदेश दिया है।

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