Bahula Chaturthi 2026 Moonrise Time: बहुला चतुर्थी पर कब उदय होगा चंद्रमा? यहां जानें सही टाइम

Published : Aug 31, 2026, 09:52 AM IST
Bahula Chaturthi 2026 Moonrise Time

सार

Bahula Chaturthi 2026: इस बार बहुला चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को किया जाएगा। इस व्रत में चंद्रमा के दर्शन और पूजा करना जरूरी होता है। जानें बहुला चतुर्थी 2026 पर कब निकलेगा चंद्रमा?

Bahula Chaturthi Par Kab Niklega Chandrma: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इसे हेरंब संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। यही वजह है कि इस दिन महिलाओं को चंद्रमा के उदय होने का इंतजार रहता है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं जानना चाहती हैं कि बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय क्या है? आगे जानिए बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का सही समय…

बहुला चतुर्थी 2026 पर चंद्रोदय का समय क्या है?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, 31 अगस्त, सोमवार को बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा रात को लगभग 08 बजकर 29 मिनिट पर उदय होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में थोड़ा-बहुत अंतर आ सकता है। चंद्रमा के दर्शन-पूजन के बाद महिलाएं अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं।

बहुला चतुर्थी पर कैसे करें चंद्रमा की पूजा?

बहुला चतुर्थी के दिन सबसे पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा की पूजा करने का विधान है। गणेश जी की पूजा पूरी करने के बाद चंद्रोदय का इंतजार करें। जैसे ही चंद्रमा दिखाई दे, उन्हें साफ जल से अर्घ्य दें। इसके बाद फूल, अक्षत और कुमकुम अर्पित करें। अंत में हाथ जोड़कर भगवान श्रीगणेश और चंद्रदेव से व्रत का पूरा फल देने की प्रार्थना करें।

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बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा दिखाई न दे तो क्या करें?

कई बार आसमान में बादल होने या किसी अन्य वजह से चंद्रमा दिखाई नहीं देता। ऐसी स्थिति में परेशान होने की जरूरत नहीं है। चंद्रोदय का समय बीतने के कुछ देर बाद जिस दिशा में चंद्रमा का उदय होता है, उस दिशा की ओर मुंह करके पूजा और अर्घ्य दे सकते हैं। मान्यता है कि इस तरह पूजा करने से भी व्रत का फल प्राप्त होता है।

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चतुर्थी पर क्यों होती है श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीगणेश का जन्म चतुर्थी तिथि को हुआ था। यही वजह है कि हर महीने आने वाली चतुर्थी पर गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। वहीं, श्रीगणेश के साथ चंद्रमा की पूजा किए जाने के पीछे भी एक प्रचलित कथा है। उसके अनुसार, एक बार चंद्रमा ने भगवान श्रीगणेश के स्वरूप का मजाक उड़ाया था। इससे नाराज होकर गणेश जी ने चंद्रमा को उनकी चमक कम होने का श्राप दे दिया। बाद में चंद्रमा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से माफी मांगी। तब श्रीगणेश ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि अब से हर चतुर्थी पर मेरे साथ चंद्रमा की भी पूजा की जाएगी। तभी से चतुर्थी पर गणेश जी के साथ चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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