Bahula Chaturthi 2025: इस बार बहुला चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को किया जाएगा। इसे हेरंब और संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा करने का भी विधान है।
Bahula Chaturthi Ki Katha Hindi Mai: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी कहते हैं। धर्म ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो भी महिला ये व्रत करती हैं, उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस व्रत में श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस व्रत से जुड़ी एक रोचक कथा भी जो व्रत करने वाले को जरूर सुननी चाहिए। आगे पढ़ें बहुला चतुर्थी की कथा…
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बहुला चतुर्थी की कथा
बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में एक ब्राह्मण रहता था। उसके पास कई गायें थीं। उन्हीं में एक गाय का नाम बहुला था। बहुला अपने बछड़े से बहुत प्यार करती थी और उसका बछड़ा भी अपनी मां से बहुत जुड़ा हुआ था। एक दिन बहुला जंगल में घास चरते समय अपने झुंड से अलग हो गई। वह रास्ता भटक गई और उसे अपने बछड़े की चिंता सताने लगी। तभी अचानक उसके सामने एक भूखा शेर आ गया। शेर उसे अपना शिकार बनाने वाला था।
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बहुला ने शेर से विनती करते हुए कहा कि उसका बछड़ा भूखा है और वह उसे दूध पिलाकर वापस लौट आएगी। उसने शेर से कुछ समय के लिए उसे जाने देने की बात कही। बहुला की बात सुनकर शेर ने उसे जाने की अनुमति दे दी। बहुला अपने घर पहुंची और सबसे पहले अपने बछड़े को दूध पिलाया। उसने उसे खूब प्यार किया। इसके बाद अपने दिए हुए वचन को निभाने के लिए वह वापस जंगल में शेर के पास पहुंच गई।
बहुला को दोबारा अपने सामने देखकर शेर हैरान रह गया। गाय ने अपना वादा निभाया था। उसकी सच्चाई और वचन के प्रति निष्ठा देखकर शेर का मन बदल गया और उसने बहुला को जाने दिया। बहुला खुशी-खुशी अपने बछड़े के पास लौट आई। मान्यता है कि बहुला चतुर्थी पर इस कथा को श्रद्धा से सुनने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। साथ ही संतान सुख की प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है।
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