उज्बेकिस्तान के समरकंद के नीले गुंबद सिर्फ खूबसूरती नहीं! इनके पीछे छिपी है सदियों पुरानी तकनीक, खनिजों और तैमूरी शासकों की रहस्यमयी पसंद, जिसने रेगिस्तान के बीच इस शहर को ‘ब्लू सिटी’ बना दिया।
Why Samarkand Is Blue: उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद की तस्वीर देखते ही सबसे पहले जो चीज नजर आती है, वह है इसका चमकदार नीला और फिरोजी रंग। रेगिस्तान और मिट्टी के रंगों के बीच खड़े Registan Square, Shah-i-Zinda, Gur-e-Amir और Bibi-Khanym Mosque के नीले गुंबद किसी कल्पना की दुनिया जैसे लगते हैं। लेकिन यह रंग महज खूबसूरती के लिए नहीं चुना गया था। इसके पीछे सदियों पुरानी संस्कृति, वास्तुकला, खनिजों और शासकों की पसंद है। समरकंद की नीली पहचान खास तौर पर तैमूरी दौर में मजबूत हुई और आज यही रंग शहर की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
नीला रंग आखिर आया कहां से?
समरकंद की इमारतों पर दिखाई देने वाला नीला रंग नॉर्मल पेंट नहीं है। यहां वास्तुकारों ने glazed ceramic tiles का यूज किया। इन टाइलों पर खनिज आधारित रंग और ग्लेज लगाकर उन्हें तेज तापमान पर भट्ठियों में पकाया जाता था। इससे सतह कांच जैसी मजबूत और चमकदार बन जाती थी। गहरे नीले रंग के लिए कोबाल्ट बेस्ड रंगों और फिरोजी रंग के लिए तांबे से जुड़े ग्लेज का यूज होता था। यही तकनीक नीले रंग को तेज धूप और लंबे समय तक टिके रहने में मदद करती थी। इसलिए सदियों पुरानी इमारतों पर भी यह रंग आज बेहद अट्रैक्टिव दिखाई देता है।
रेगिस्तान में नीला रंग ही क्यों पसंद आया?
समरकंद मध्य एशिया के शुष्क इलाके में स्थित है। ऐसे वातावरण में आसमान और पानी का महत्व बहुत ज्यादा है। मध्य एशियाई सांस्कृतिक परंपराओं में नीले और फिरोजी रंग को आसमान, पानी और सुरक्षा जैसे भावों से जोड़ा जाता रहा है। इसलिए किसी गुंबद को नीले रंग में सजाना केवल सजावट नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश भी है। कल्पना कीजिए - चारों तरफ मिट्टी और रेगिस्तान के रंग हों और उसके बीच आसमान की तरह चमकता नीला गुंबद दिखाई दे। शायद यही वजह है समरकंद की वास्तुकला दूर से ही अलग पहचान में आ जाती है।
तैमूर के दौर में बनी ‘ब्लू सिटी’ की पहचान
समरकंद की नीली वास्तुकला को सबसे बड़ा बढ़ावा तैमूरी दौर में मिला। अमीर तैमूर ने समरकंद को अपनी राजधानी बनाया और शहर को भव्य इमारतों से सजाने की कोशिश की। बाद में उसके वंशजों, खासकर उलुग बेग के समय में भी यहां वास्तुकला और विज्ञान को काफी बढ़ावा मिला। इसी दौर में नीले और फिरोजी टाइलों से सजे विशाल धार्मिक और शैक्षणिक भवन शहर की पहचान बनने लगे। आज Registan Square की 3 मदरसों की भव्य इमारतों पर दिखाई देने वाली नीली टाइलें इसी स्थापत्य परंपरा की याद दिलाती हैं।
क्या समरकंद की हर इमारत नीली है?
नहीं। यह एक आम गलतफहमी है। समरकंद की ऐतिहासिक इमारतों में नीला और फिरोजी रंग बहुत प्रमुख जरूर है, लेकिन इनके साथ सफेद, हरा, पीला और अन्य रंगों का भी यूज हुआ है। अलग-अलग इमारतों और अलग-अलग समय में सजावट की शैली बदलती रही।
सिर्फ खूबसूरती नहीं, विज्ञान और कारीगरी भी
समरकंद की नीली इमारतों को देखकर यह समझ आता है कि मध्यकालीन कारीगर केवल सुंदर डिजाइन नहीं बना रहे थे, बल्कि रंग, ग्लेज, भट्ठी और ज्यामितीय पैटर्न की टफ टेक्निक्स पर भी काम कर रहे थे। कुछ सजावट में छोटे-छोटे कटे हुए टाइल टुकड़ों को जोड़कर मोजेक बनाया जाता था, जबकि अन्य तकनीकों में अलग-अलग रंगों को बहुत संभालकर पकाया जाता था।


