Nepal Disaster: नेपाल में बाढ़ से 600 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। रसुवा-नुवाकोट से बहे शव 100 किमी तक दूर मिले हैं। 4 जिलों के मुर्दाघर भर गए हैं। जानें ताजा अपडेट्स।
Nepal Flood Latest Update: नेपाल के मध्य हिस्से में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने चारों तरफ ऐसा खौफनाक मंजर छोड़ दिया है, जिसे देखकर रूह कांप जाए। रसुवा, नुवाकोट और भोटेकोशी क्षेत्र में पानी और कीचड़ के सैलाब ने बस्तियों, पुलों, सड़कों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया। अब जैसे-जैसे पानी घट रहा है और मलबे की परतों को हटाया जा रहा है, तबाही का सबसे दर्दनाक मंजर सामने आ रहा है। शनिवार को चौथे दिन इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 तक पहुंच गई है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
मुर्दाघरों में खत्म हुई जगह, पड़ोसी जिलों में भेजे जा रहे शव
ग्राउंड जीरो से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि नेपाल के अस्पतालों और प्रशासनिक व्यवस्था पर शवों के प्रबंधन का भारी दबाव आ गया है। 'द काठमांडू पोस्ट' के मुताबिक, रसुवा और नुवाकोट से बहे शव 100 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर चितवन, तनहुं, नवलपरासी और धाडिंग जिलों की नदियों से बरामद किए जा रहे हैं। नुवाकोट, धाडिंग और नवलपरासी जिलों के मुर्दाघरों में जगह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। हालात इतने गंभीर हैं कि शवों को सुरक्षित रखने के लिए पड़ोसी जिलों के अस्पतालों में भेजा जा रहा है। पानी के तेज बहाव और मलबे की रगड़ से कई शव इस कदर क्षत-विक्षत हो चुके हैं कि परिजनों के लिए उनकी शिनाख्त करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
नेपाल में रेस्क्यू के बीच सिर पर नया खतरा
जब राहत और बचाव दल अपनी जान जोखिम में डालकर कीचड़ और पत्थरों के बीच अपनों को तलाश रहे हैं, उसी समय एक और खतरे की घंटी बज गई है। सैटेलाइट तस्वीरों और चीनी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी के फुटेज से पता चला है कि आपदा वाले इलाके में करीब 2,950 मीटर की ऊंचाई पर एक विशालकाय प्राकृतिक झील बन गई है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के एक्सपर्ट च्यांगगॉन्ग झांग के अनुसार, बर्फ और चट्टानों के भूस्खलन ने नदी के रास्ते को रोक दिया, जिससे यह विशाल जलाशय बन गया। इस झील में करीब 1,200 ओलंपिक साइज स्विमिंग पूल जितना पानी जमा है, जो अब ऊपर से ओवरफ्लो होना शुरू हो गया है।
रेस्क्यू टीमों पर आफत
यह अस्थायी बांध गिरोंग पोर्ट से करीब 1,000 मीटर ऊपर और 10 किमी दूर स्थित है। अगर यह बैरियर अचानक टूटा, तो नीचे सर्च ऑपरेशन में जुटे जवानों और बची-खुची बस्तियों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसे लेकर अलर्ट भी जारी किया गया है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
यूनिवर्सिटी ऑफ ग्राज के भू-वैज्ञानिक जैकब स्टीनर का कहना है कि हाई तापमान के चलते ग्लेशियरों का पिघलना जारी है। नदी के रास्ते में जगह-जगह मलबा अटका होने से कई छोटे-छोटे जलभराव वाले पॉकेट्स बन रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का यह भी आकलन है कि अगर यह झील बहती भी है, तो उसका असर पहले वाले महाविनाश जितना व्यापक होने की आशंका कम है, लेकिन सतर्कता में ढिलाई भारी पड़ सकती है।


