New Lake Flood Risk Nepal: नेपाल-चीन सीमा पर बनी नई झील ने चिंता बढ़ा दी है। आखिर कौन सी है ये झील और क्यों जताई जा रही है दूसरी जल प्रलय की आशंका? जानिए पूरी डिटेल।
Nepal Flash Flood 2026: नेपाल में 26 अगस्त को आई भयावह बाढ़ के जख्म अभी भरे भी नहीं हैं कि हिमालय में एक और खतरे ने चिंता बढ़ा दी है। नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक बनी एक नई ‘बैरीयर लेक’ ने दोनों देशों की निगरानी बढ़ा दी है। यह कोई पुरानी या नाम वाली झील नहीं, बल्कि बर्फ, चट्टान और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद बनी झील है। सबसे अहम बात यह है कि 28 अगस्त को इसके ओवरफ्लो होने की खबर सामने आई, जिसके बाद नीचे की ओर फिर बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का खतरा बढ़ गया।
कौन सी है यह झील?
- यह कोई पारंपरिक नाम वाली झील नहीं है। इसे फिलहाल बैरीयर लेक यानी प्राकृतिक मलबे से बनी झील के रूप में बताया जा रहा है।
- यह झील नेपाल के रसुवा जिले में छोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु त्सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम के पास बनी।
- 26 अगस्त की आपदा में ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में बर्फ-पत्थर के बड़े ढहने और मलबे के प्रवाह ने नदी का रास्ता बाधित किया। इसके पीछे पानी जमा होने से यह अस्थायी झील बनी।
- झील में पानी की मात्रा तेजी से बढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार इसका जलस्तर बढ़कर करीब 20 लाख घन मीटर से ज्यादा पहुंच गया था और बाद में इसके ओवरफ्लो होने की सूचना आई।
- चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इस बैरीयर लेक के टूटने के जोखिम को गंभीर बताया था और अगले कुछ दिनों में संभावित ब्रीच को लेकर चेतावनी दी थी।
- नेपाल और चीन दोनों के लिए चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह पूरा क्षेत्र भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़ा है। यहां अचानक पानी और मलबे का बहाव नीचे की आबादी तक तेजी से पहुंच सकता है।
- 26 अगस्त की बाढ़ में इसी नदी तंत्र में पानी, मिट्टी और बड़े बोल्डरों का बेहद तेज प्रवाह आया था। ICIMOD के अनुसार त्रिशूली नदी में कुछ स्थानों पर जलस्तर करीब 30 मिनट में 7 से 9 मीटर तक बढ़ा।
- नई झील के ओवरफ्लो या ब्रीच की खबर के बाद नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन तक कुछ समय के लिए रोकने पड़े, क्योंकि अचानक अतिरिक्त बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था।
- हालांकि इसे यह कहना सही नहीं होगा कि दूसरी बार 26 अगस्त जैसी ही तबाही निश्चित है। विशेषज्ञों और अधिकारियों की चिंता संभावित अतिरिक्त बाढ़ को लेकर है; इसकी वास्तविक तीव्रता कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
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क्यों है यह घटना इतनी अहम?
- हिमालय में ऐसी बैरीयर लेक बेहद संवेदनशील हो सकती है। अगर प्राकृतिक मलबे का बांध टूटता है तो जमा पानी अचानक नीचे की ओर निकल सकता है और उसके साथ मिट्टी, चट्टान और मलबा भी बह सकता है। इसे भूस्खलन से बनी झील के फटने से आई बाढ़ (Landslide Lake Outburst Flood) जैसे खतरे के रूप में समझा जाता है।
- 26 अगस्त 2026 की घटना ने दिखा दिया कि हिमालय में एक ग्लेशियर या बर्फ-पत्थर का ढहना किस तरह कुछ ही समय में नदी की बाढ़ को बड़े आपदा-क्रम में बदल सकता है। अब नई बनी इस झील और इसके आसपास का क्षेत्र इसलिए नेपाल और चीन, दोनों की नजर में है।
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