तिब्बत सीमा पर टूटे पहाड़ और उफनती त्रिशूली नदी ने नेपाल में मचाया खौफनाक तांडव। पलक झपकते ही पूरे के पूरे गांव गायब, 392 मौतें और 290 भारतीय समेत 1400 से ज्यादा लोग लापता। क्या यह प्रकृति का कोई बड़ा इशारा है?
Nepal Flood Video: नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया, जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं। तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ा और मलबे का तेज बहाव नदी किनारे बसे गांवों में घुस गया। सामने आए वीडियो में एक पूरा इलाका कुछ ही सेकंड में बाढ़ और मलबे की चपेट में आता दिखाई देता है।
पानी नहीं, मौत का मलबा बह रहा था?
हिमालय की वादियों में उस दिन सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक तिब्बत सीमा की ओर से आई एक हिंसक चीख ने सन्नाटे को चीर दिया। भोतेकोशी और त्रिशूली न नदियों में मलबे और गाद का ऐसा भयंकर सैलाब आया जिसने किनारे बसे गांव को संभलने का एक मौका तक नहीं दिया। महज़ कुछ ही सेकंड में पूरा का पूरा गांव जलमग्न होकर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। वीडियो में पानी के साथ भारी गाद और मलबा तेज रफ्तार से आगे बढ़ता नजर आता है। पुल, सड़कें और गाड़ियां क्षतिग्रस्त या बह गईं, जबकि कई इलाके मोटी गाद के नीचे दब गए। कुछ देर बाद जहां घर और सड़कें थीं, वहां सिर्फ मलबा और कीचड़ दिखाई देता है।
आखिर इतनी तेजी से कैसे बढ़ा पानी?
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के जलवायु विशेषज्ञों के मुताबिक, इस अचानक बाढ़ की संभावित वजह ग्लेशियर से आया हिमस्खलन हो सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि त्रिशूली नदी के एक स्थान पर महज आधे घंटे में पानी का स्तर करीब 9 मीटर बढ़ गया।
1400 से ज्यादा लापता, 392 मौतों की पुष्टि
इस भीषण आपदा में 1,400 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 392 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक दर्जनों पुल तबाह हुए और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे राहत और बचाव अभियान प्रभावित हो रहा है।
290 भारतीयों से संपर्क टूटा
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि 84 भारतीयों को अब तक सुरक्षित बचाया गया है। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु, त्रिशूली-1 बिजली परियोजना के कर्मचारी और अलग-अलग राज्यों से पहुंचे पर्यटक शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीयों का पता लगाने के लिए नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क किया जा रहा है।
क्या हिमालय बन रहा है बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय का अस्थिर बर्फीला तंत्र, जिसे पृथ्वी का “तीसरा ध्रुव” भी कहा जाता है, तेजी से चिंता का विषय बन रहा है। जलवायु परिवर्तन से ग्लेशियरों के पिघलने की घटनाएं बढ़ रही हैं। अगस्त 2025 में भी तिब्बत में ग्लेशियल झील के ओवरफ्लो से ऐसी बाढ़ आई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हुई थी और नेपाल-चीन के महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचा था।


