कैलाश यात्रा से लौटते ही इमिग्रेशन दफ़्तर में टकराया प्रलयकारी सैलाब! तिब्बत के ग्यिरोंग में अचानक आई बाढ़ से कैलाश यात्रा समूह के 80 लोग लापता और सागा से सद्गुरु की भावुक अपील... मलबे में छिपे किस अनदेखे सच की खोज में जुटे हैं वॉलंटियर्स?

Sadhguru Kailash Yatra Flood: चीन के तिब्बत क्षेत्र स्थित ग्यिरोंग (Gyirong) में आई भीषण और अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। कैलाश-मानसरोवर यात्रा से लौट रहा श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था इस कुदरती तबाही की ज़द में आ गया है। जिस समय बाढ़ का भयानक सैलाब आया, उस समय श्रद्धालु सीमा पर स्थित इमिग्रेशन दफ़्तर में कागज़ी कार्रवाई पूरी कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी और मलबे का बहाव इतना तेज़ था कि देखते ही देखते इमिग्रेशन ऑफिस की इमारत और ग्यिरोंग कस्बे का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया।

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इमिग्रेशन सेंटर से संपर्क टूटा, 80 लोगों की सलामती पर गहराया संकट

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जगगी वासुदेव ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए बताया कि इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद श्रद्धालुओं का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ के बाद से वहां से कोई आधिकारिक जानकारी या संदेश नहीं मिला है। कैलाश यात्रा पर निकले कुल 21 समूहों के डेटा के अनुसार, 495 श्रद्धालु सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग अभी तिब्बत में, 148 नेपाल में, 77 इमिग्रेशन सेंटर में और 3 वॉलंटियर्स नेपाल के तिमुरे इलाके में मौजूद थे। इस बीच इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद 80 सदस्यों का संपर्क पूरी तरह कट जाने से उनके परिजनों की चिंता चरम पर पहुंच गई है।

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सागा में डटे सद्गुरु, राहत अभियान में उतरने के लिए चीनी अधिकारियों से अनुमति की मांग

इस संकट की घड़ी में सद्गुरु खुद जमीनी हालात पर नज़र रखने के लिए तिब्बत के सागा (Saga) इलाके में मौजूद हैं। 27 अगस्त 2026 को उन्होंने चीनी अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को एक भावुक पत्र लिखकर खुद ग्यिरोंग जाने की अनुमति मांगी है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि वे और उनके वॉलंटियर्स राहत और बचाव कार्यों के नियमों का पूरा सम्मान करते हुए केवल मदद के इरादे से वहां जाना चाहते हैं, ताकि मलबे के बीच से अपनों की खोज और परिवारों को जानकारी देने में मदद की जा सके।

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जोखिम उठाकर भी अपनों को ढूंढने का संकल्प, दुनिया भर से हो रही सलामती की दुआएं

सद्गुरु ने प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वॉलंटियर्स और सपोर्ट टीमें जान का जोखिम उठाकर भी खोज अभियान में शामिल होने के लिए तैयार हैं। नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में राहत कार्य जारी हैं, लेकिन सड़कों के बह जाने और संचार सेवाएं ठप होने से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों की निगाहें प्रशासन की अनुमति और खोज अभियान के नतीजों पर टिकी हैं।

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कहां हैं वे 80 लोग?

ग्यिरोंग में मौजूद इमिग्रेशन सेंटर पर बाढ़ का हमला इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक हिस्सा बना हुआ है। जिस जगह पर यात्री सुरक्षित निकलने की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे, वही जगह अचानक तेज पानी और मलबे की चपेट में आ गई। परिवार अब किसी सूचना का इंतजार कर रहे हैं। सद्गुरु और उनकी टीम घटनास्थल तक पहुंचने की अनुमति मांग रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद वे 80 लोग कहां हैं और उनमें से कितने सुरक्षित हैं? जब तक घटनास्थल से आधिकारिक पुष्टि नहीं आती, तब तक उनके बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है और राहत एवं तलाश अभियान पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।