दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की पांच मंजिला इमारत गिरने से 5 लोगों की मौत और 11 लोगों के रेस्क्यू की खबर है। बेसमेंट में चल रहे निर्माण और बिल्डिंग की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं, जिनके जवाब जांच के बाद सामने आएंगे।

रविवार की दोपहर दिल्ली के सत्य निकेतन में कुछ सेकेंड के भीतर एक पूरी इमारत मलबे में बदल गई। जहां कुछ देर पहले तक कमरों में छात्र थे, वहां अचानक धूल, सीमेंट और सरिये का ढेर नजर आने लगा। इस हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की खबर है और 11 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। लेकिन मलबे से ज्यादा भारी वे सवाल हैं, जिनका जवाब अब प्रशासन और जांच एजेंसियों को देना होगा।

DU छात्रों से भरे PG में आखिर हुआ क्या?

मोतीबाग के पास सत्य निकेतन इलाके में गिरी इमारत में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से PG संचालित था। बेसमेंट समेत पांच मंजिला इस इमारत में हर फ्लोर पर चार कमरे बताए जा रहे हैं और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों के छात्र रह रहे थे। हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। छुट्टी का दिन होने के कारण PG में छात्रों की मौजूदगी ज्यादा होने की आशंका थी। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए NDRF, फायर ब्रिगेड, पुलिस समेत अन्य सुरक्षा बलों की टीमें जुटी हैं।

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बेसमेंट में निर्माण कार्य ने बढ़ाई जांच की अहमियत

पुलिस के मुताबिक इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। हादसे के बाद निर्माण कार्य, इमारत की संरचनात्मक मजबूती और पानी जमा होने जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसी इमारत में निर्माण या बदलाव का काम चल रहा था, तो उसमें छात्रों का रहना सुरक्षित था या नहीं? क्या निर्माण शुरू होने से पहले संरचनात्मक सुरक्षा की जांच हुई थी? क्या किसी स्तर पर शिकायत या खतरे के संकेत मिले थे? इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

हादसा सिर्फ बिल्डिंग का है या सिस्टम की चूक का?

घटनास्थल पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री कपिल मिश्रा और सांसद बांसुरी स्वराज समेत अधिकारी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताया। लेकिन राहत और बचाव अभियान खत्म होने के बाद असली परीक्षा शुरू होगी। दिल्ली के उन इलाकों में जहां पुराने मकानों को PG में बदला गया है, वहां भवन की क्षमता, निर्माण में बदलाव और सुरक्षा मानकों की निगरानी कितनी प्रभावी है—यह सवाल अब सत्य निकेतन से आगे जाएगा।

मलबे से जिंदगियां बचाने की कोशिश जारी है। मगर जब रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होगा, तब सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा, सत्य निकेतन में सिर्फ एक इमारत गिरी थी या उसकी निगरानी करने वाली व्यवस्था भी?

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