जशपुर के युवा किसान अंकित लकड़ा ने तालाब के ऊपर 1,200 मुर्गियों और नीचे मछलियों का अनोखा मॉडल अपनाया है। मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर उन्होंने एक ही खेत से कमाई के कई रास्ते तैयार किए हैं।
कभी जिस खेत में बारिश के भरोसे सिर्फ धान की फसल होती थी, आज वही खेत सालभर कमाई के कई रास्ते तैयार कर रहा है। जशपुर जिले के रतबा गांव के युवा किसान अंकित लकड़ा ने खेती को एक अलग नजरिए से देखा। उन्होंने खेत में बने तालाबों को सिर्फ मछली पालन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके ऊपर मुर्गियों के शेड और मेड़ों पर फलदार पौधे लगाकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसमें एक गतिविधि दूसरी के काम आ रही है।
तालाब के ऊपर मुर्गियां, नीचे मछलियां
अंकित ने अपने खेत में दो तालाब तैयार किए हैं। इन तालाबों के ऊपर करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की क्षमता वाले शेड बनाए गए हैं। यहां मुर्गी पालन और मछली पालन को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के तौर पर उपयोगी होता है। इससे बाहरी फीड पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। यानी एक ही जगह से दो कृषि गतिविधियां चल रही हैं और संसाधनों का दोहरा इस्तेमाल हो रहा है।
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तालाब सिर्फ मछलियों के लिए नहीं
इस मॉडल की खास बात यह भी है कि तालाब अंकित के लिए सिंचाई का साधन बन गए हैं। तालाब के पानी का इस्तेमाल गर्मी में खेतों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इससे बारिश के मौसम के अलावा दूसरे सीजन में भी खेती संभव हुई है।
तालाब की मेड़ों पर आम, लीची समेत फलदार पौधे लगाए गए हैं। इन पौधों को तालाब से पानी मिलता है, जबकि उनकी जड़ें मेड़ की मिट्टी को मजबूती देने और कटाव कम करने में मदद कर सकती हैं। भविष्य में यही बागवानी अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेगी।
8 लाख की सहायता ने बढ़ाया मॉडल का दायरा
अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता मिली। इसके अलावा पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सुविधाओं का लाभ भी मिला। कृषि और मत्स्य विभाग से मिले मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने खेत को एकल फसल से निकालकर मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़ दिया।
खेत अब बना ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल
अंकित की कहानी का सबसे बड़ा सबक यह है कि खेती में कमाई बढ़ाने के लिए हमेशा ज्यादा जमीन जरूरी नहीं होती। उपलब्ध पानी, भूमि और संसाधनों की बेहतर योजना बनाकर एक ही खेत में कई आय के स्रोत तैयार किए जा सकते हैं। उनका मॉडल ग्रामीण युवाओं के लिए यह संकेत देता है कि खेती को सिर्फ पारंपरिक फसल तक सीमित रखने के बजाय उसे एक एकीकृत कृषि व्यवसाय के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
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