Nepal Flash Flood: नेपाल में बाढ़ ने गांवों को मलबे में बदल दिया, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। नदी में बनी रुकावट से फिर आ सकती है तबाही, जबकि UP-बिहार तक पहुंच सकता है पानी। पहाड़ों के सीने से उठी मलबे की खौफनाक दीवार! नेपाल-तिब्बत सीमा पर 165 ज़िंदगियां दफ़्न, सैकड़ों लापता। जानिए क्यों दोबारा तबाही मचाने आ रहा है सैलाब?
काठमांडू: नेपाल और चीन (तिब्बत) के दुर्गम हिमालयी सीमावर्ती इलाके में आई भीषण बाढ़ ने तबाही की ऐसी तस्वीर सामने रख दी है, जिसे देखकर इसकी भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हवाई फुटेज में कई गांव और बाजार कीचड़, मलबे और टूटे ढांचों में बदलते दिखाई दे रहे हैं। तिब्बत क्षेत्र से निकलने वाली ल्हेन्डे नदी के ऊपरी हिस्से में विशाल हिमस्खलन (Ice-Rock Avalanche) और बर्फ खिसकने से बना कच्चा बांध अचानक ढह गया। देखते ही देखते भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के जलस्तर में महज 30 मिनट के भीतर 9 मीटर (करीब 30 फीट) तक की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई, जिसने दर्जनों कस्बों और गांवों को नामो-निशान मिटा दिया। सबसे बड़ा डर यह है कि खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नेपाल-चीन सीमा के ऊपरी हिस्से में नदी का रास्ता अभी भी बाधित है। ऐसे में पानी का दबाव बढ़ने पर दोबारा अचानक बाढ़ आ सकती है।
हवाई वीडियो में कैद तबाही, गांवों की पहचान मुश्किल
बाढ़ के बाद सामने आए हवाई फुटेज में तबाही का पैमाना साफ नजर आ रहा है। जिन इलाकों में कुछ समय पहले तक घर, सड़कें और बाजार मौजूद थे, वहां अब कीचड़ और मलबे का फैलाव दिखाई दे रहा है। बचावकर्मी प्रभावित इलाकों में गाद और मलबे के बीच जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई जगहों पर बाढ़ का पानी बहुमंजिला इमारतों की निचली मंजिलों तक पहुंच गया। नेपाली सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में उड़ानें भी संचालित की हैं। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के नेपाल प्रमुख डेविड फिशर के मुताबिक पूरे गांव और बाजार क्षेत्र तबाह हो गए हैं।
165 मौतें, सैकड़ों लापता; भारतीय नागरिक भी शामिल
नेपाल में इस आपदा से कम से कम 165 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। रिपोर्ट के अनुसार 403 लोग लापता हैं, जिनमें 142 भारतीय नागरिक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। उधर, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में भी मडस्लाइड से भारी नुकसान की खबर है। वहां तीन लोगों की मौत और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
बस और कारें खिलौनों की तरह बहीं
तिब्बत की ओर से सामने आए एक सर्विलांस वीडियो ने इस आपदा की भयावहता को और उजागर कर दिया। वीडियो में मिट्टी और मलबे की विशाल दीवार एक बहुमंजिला इमारत की ओर बढ़ती दिखाई देती है। नीचे मौजूद लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आते हैं। तेज बहाव में बसें और कारें भी ऐसे बहती दिखाई दीं, जैसे वे खिलौने हों। नेपाल में पुलिस द्वारा साझा की गई तस्वीरों में भी बाढ़ का पानी घरों और दूसरे ढांचों को अपनी चपेट में लेता नजर आया।

क्या दूसरी बाढ़ आने वाली है?
इस आपदा के बाद अब सबसे गंभीर चिंता नदी के ऊपरी हिस्से में बनी रुकावट को लेकर है। ICIMOD के जलवायु और पर्यावरण जोखिम विभाग के प्रमुख कियांगगोंग झांग ने चेतावनी दी है कि नेपाल-चीन सीमा पर नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी रुकावट मौजूद है। अगर यह रुकावट अचानक टूटती है तो बड़ी मात्रा में जमा पानी और मलबा नीचे की ओर तेजी से आ सकता है। इसका मतलब है कि राहत अभियान के बीच प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
भारत तक पहुंच सकता है असर
नेपाल की नदियों का बहाव आगे चलकर भारत में प्रवेश करता है। यही वजह है कि नेपाल में आई इस बाढ़ का असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में बाढ़ की चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। जून से सितंबर के बीच दक्षिण एशिया में मानसूनी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन आम हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता को बढ़ा रहा है।


