Nepal Rasuwa Flash Floods Survivor Story: नेपाल के रसुवा में ग्लेशियर ढहने से आई भीषण बाढ़ में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। केशव प्रसाद बराल की दर्दनाक कहानी ने आपदा का सच दिखाया। उन्होंने बताया कैसे उनकी आंखों के सामने पत्नी कीचड़ में दफन हो गई।

Rasuwa Flash Flood: नेपाल के रसुवा में आई भीषण बाढ़ और मलबे ने कुछ ही पलों में पूरे इलाकों की तस्वीर बदल दी। 68 साल के केशव प्रसाद बराल किसी तरह जान बचाकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उनकी पत्नी अब भी मलबे के नीचे हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ घर, सड़कें और पुल नहीं बहाए, बल्कि कई परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया। रसुवा जिले में तेज बहाव के साथ आया मलबा इतना भयावह था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इस आपदा में नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में कम से कम 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।

‘पत्नी का हाथ पकड़ना चाहता था, लेकिन...’

रेस्क्यू के बाद अस्पताल पहुंचे 68 वर्षीय केशव प्रसाद बराल ने जो बताया, वह इस त्रासदी की भयावहता को समझने के लिए काफी है। उन्होंने ANI को बताया कि अचानक उनकी तरफ मिट्टी और मलबे का एक विशाल सैलाब आया। उन्होंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के सामने वह बेबस हो गए। बराल किसी तरह बच निकले। उनकी पत्नी मलबे के नीचे दब गईं। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी अभी भी उसी मलबे में कहीं हैं और अब उनके बचने की उम्मीद नहीं है। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। रसुवा में कई लोग अपने परिजनों की तलाश में हैं और राहत टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों तक पहुंचना है, जहां बाढ़ और भूस्खलन ने रास्तों का नामोनिशान मिटा दिया है। देखें वीडियो-

भूकंप नहीं, ग्लेशियर ढहने से आई तबाही

शुरुआती जानकारी में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इस घटना को 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़ा था। बाद में आकलन बदला और इसे ग्लेशियर के एक हिस्से के ढहने से जुड़ी घटना बताया गया। ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का बड़ा मलबा नदी में गिरा, जिससे पानी का अचानक दबाव बढ़ा और भीषण बाढ़ की लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी। विशेषज्ञों के मुताबिक, ल्हेंदे खोला नदी में बर्फ और चट्टानों के मलबे से अचानक पानी का बड़ा उफान आया। इसका असर भोटेकोशी नदी क्षेत्र में दिखा, जहां गांवों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा।

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सैकड़ों लोग अब भी लापता, भारतीयों की भी चिंता

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क टूट गया है। ताजा रिपोर्टों में सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं और भारतीय नागरिकों की संख्या भी काफी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में भारतीयों समेत बड़ी संख्या में यात्रियों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। कैलाश मानसरोवर यात्रा के रास्ते में मौजूद यात्रियों को लेकर भी परिवारों की चिंता बढ़ी है। भारत ने स्थिति पर नजर रखते हुए नेपाल के साथ संपर्क बढ़ाया है, जबकि बिहार में NDRF की नौ टीमें एहतियातन तैनात की गई हैं।

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बचाव अभियान जारी, लेकिन हर मिनट भारी

नेपाल में सेना, पुलिस और राहत दल प्रभावित इलाकों में खोजबीन कर रहे हैं। कई जगह पानी का तेज बहाव, जमा मलबा और खराब मौसम हेलिकॉप्टर और जमीन के रास्ते राहत पहुंचाने में बाधा बन रहे हैं। ऐसे में हर बरामद शव के साथ उम्मीद और चिंता दोनों बढ़ रही हैं कि शायद किसी मलबे के नीचे कोई जिंदगी अब भी सांस ले रही हो। केशव प्रसाद बराल बच गए, लेकिन उनकी कहानी इस आपदा का सबसे दर्दनाक चेहरा सामने रखती है, कुछ सेकंड में सब कुछ आंखों के सामने था और अगले ही पल जिंदगी से सबसे करीबी इंसान हमेशा के लिए दूर हो गया।

भारतीय नागरिकों के लिए नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं-

  • +977 985 131 6807
  • +977 970 910 7500

दोनों नंबरों पर WhatsApp के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।