Nepal Flash Flood: नेपाल में फ्लैश फ्लड ने मचाई खौफनाक तबाही! तिब्बत से आई खौफनाक जलप्रलय में 160 जिंदगियां दफन! 133 भारतीय तीर्थयात्री लापता, बस्तियां मिट गईं। देखिए बाढ़ के 9 रोंगटे खड़े करने वाले वीडियो, जो कुदरत के कहर का प्रत्यक्ष प्रमाणा है।
Nepal Tibet Border Flood: नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति ने एक बार फिर अपना सबसे विकराल और भयावह रूप दिखाया है। बुधवार की सुबह भोटे कोशी नदी में आए अचानक जलप्रलय (फ्लैश फ्लड) ने हंसते-खेलते गांवों को पल भर में कीचड़ और मलबे के ढेर में बदल दिया। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 160 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले कम से कम 133 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जिससे उनके परिजनों में भारी कोहराम मचा हुआ है।
तिब्बत की पहाड़ियों से फूटा 'मौत का शैलाभ'
नेपाली समयानुसार सुबह करीब 9:00 बजे तिब्बत की ओर से भोटे कोशी नदी में पानी का स्तर भयानक गति से बढ़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पानी के साथ भारी मात्रा में चट्टानें, पेड़ और मलबा इतनी तेज गति से बहकर आए कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिले इस आपदा का मुख्य केंद्र बने हैं। रसुवागढी और टिमुरे जैसे सीमावर्ती इलाकों में पूरी की पूरी बस्तियां और बाजार पानी के भीषण बहाव में ताश के पत्तों की तरह ढह गए।
लापता पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की तलाश जारी
नेपाल पर्यटन बोर्ड और गृह मंत्रालय के अनुसार, आपदा के समय सीमावर्ती इलाकों और त्रिशूली नदी घाटी में लगभग 403 पर्यटक मौजूद थे, जिनमें से 341 विदेशी नागरिक थे। लापता विदेशियों में 142 भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, मलेशिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और अमेरिका के नागरिक भी शामिल हैं। मानसरोवर यात्रा के लिए इमिग्रेशन और कस्टम कार्यालयों में ठहरे दर्जनों यात्री सीधे इस जलप्रलय की चपेट में आ गए।
सेकंडों में तबाह हुई जीवन रेखाएं: रिपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बाढ़ ने नेपाल के पूरे बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया है:
- 19 पुल और 40 किमी सड़कें ध्वस्त: रसुवागढी में बना चीन-नेपाल 'फ्रेंडशिप ब्रिज' बह गया है और राजमार्ग पूरी तरह कट चुके हैं।
- 13 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त: कई बड़े पावर प्लांट पानी में डूबने से देश की 12 प्रतिशत से अधिक बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।
- 200 से अधिक ट्रक और वाहन लापता: व्यापारिक सामान से लदे सैंकड़ों भारी ट्रक नदी के तेज तेज बहाव में बह गए।
कीचड़ में जिंदगी की जंग और अंतरराष्ट्रीय सहायता
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने पूरे देश में आपातकालीन स्थिति का ऐलान करते हुए सेना, पुलिस और राहत टीमों को मलबे में दबे लोगों की तलाश में लगा दिया है। आपदा की खबर मिलते ही भारत सरकार ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया। नेपाल सरकार ने भी दुनिया भर की स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) से मदद की गुहार लगाई है। फिलहाल पूरे इलाके में चीख-पुकार और सन्नाटे के बीच मलबे को हटाने का काम जारी है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने तत्काल मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। भारतीय वायुसेना ने 10 टन राहत सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति लेकर एक परिवहन विमान भेजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
शाह बोले- नेपाल इस संकट में अकेला नहीं
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि सरकार अपने सभी साधनों और संसाधनों के साथ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सहयोग और एकजुटता के लिए धन्यवाद दिया। शाह ने कहा कि भारत की सहायता की पेशकश दोनों देशों के बीच गहरे और अटूट मैत्री संबंधों को दर्शाती है। हालांकि, ये आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और आधिकारिक विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की आशंका है।
नोट: मौतों और लापता लोगों के आंकड़ों में बदलाव संभव है। ये आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं और आधिकारिक विस्तृत पुष्टि का इंतजार है।


