Jharkhand Woman Runs Barefoot in Saree Viral Video: होम गार्ड की नौकरी के लिए झारखंड के रामगढ़ जिले की कविता साड़ी में नंगे पैर 1600 मीटर दौड़ीं और 6 मिनट में रेस पूरी की। आखिर क्या है पूरा मामला जानिए कविता की पूरी कहानी और देखें वायरल वीडियो।
Woman Runs Barefoot in Saree: झारखंड के रामगढ़ जिले की कविता कुमारी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। वजह कोई बड़ी उपलब्धि या महंगी ट्रेनिंग नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी के बीच दिखाई दी मेहनत है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता ने होम गार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा में 1600 मीटर की दौड़ महज 6 मिनट में पूरी की। खास बात यह रही कि उन्होंने यह दौड़ साड़ी पहनकर और नंगे पैर पूरी की। जानिए कविता कुमार ने ऐसा क्यों किया और देखें वायरल वीडियो।
न जूते थे, न ट्रैकसूट, फिर भी नहीं रुकी कविता
कविता कुमारी विधवा हैं और अपने दो छोटे बच्चों के साथ बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह ईंट भट्ठे पर काम करती हैं। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह दौड़ की तैयारी के लिए जूते, ट्रैकसूट या दूसरे जरूरी सामान खरीद सकें। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। बताया गया कि कविता रोज सुबह करीब 4 बजे उठकर दौड़ का अभ्यास करती थीं। कई बार उनके पास अभ्यास के लिए भी साड़ी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता था।
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होम गार्ड की नौकरी है कविता का बड़ा सहारा
कविता के लिए यह भर्ती सिर्फ एक सरकारी नौकरी पाने की कोशिश नहीं है। उनके मुताबिक, नौकरी मिलने से बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियां संभालना आसान हो सकता है। यही वजह है कि सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने शारीरिक परीक्षा की तैयारी जारी रखी। रामगढ़ में होम गार्ड भर्ती अभियान के तहत 284 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया बताई गई है। भर्ती में महिलाओं के लिए आधे पद आरक्षित हैं। इसके अलावा विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का प्रावधान बताया गया है। नीचे देखें कविता का वायरल वीडियो-
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वीडियो वायरल हुआ तो सामने आई कविता की कहानी
कविता के दौड़ने का वीडियो वहां मौजूद एक दर्शक ने रिकॉर्ड किया था। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने उनकी मेहनत की तारीफ की। कई यूजर्स ने इसे बच्चों और परिवार के बेहतर भविष्य के लिए उनकी कोशिश बताया। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दूसरा पहलू भी उठाया। उनका कहना है कि कविता की मेहनत जरूर प्रेरक है, लेकिन एक उम्मीदवार का जरूरी खेल सामान के बिना दौड़ना आर्थिक मजबूरी और व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने लाता है।
