नेपाल में फ्लैश फ्लड से भारी तबाही हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों में नुकसान दिखा। अब तक इस तबाही से 98 लोगों की मौत और 384 पर्यटकों के लापता होने की खबर है।

Nepal Flash Floods Satellite Image: नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। शुरुआती सैटेलाइट जांच में प्लैनेट लैब्स (Planet Labs) ने ऐसी तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें बाढ़ से हुए नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस आपदा में अब तक कम से कम 98 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ से तिब्बत से सटे नेपाल के इलाके में कई गांव और प्रोजेक्ट साइटें बह गईं। इस दौरान 133 भारतीयों समेत कई लोगों के लापता होने की खबर है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बाढ़ से पहले और बाद की स्थिति

प्लैनेट लैब्स की ओर से जारी सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और उसके बाद की स्थिति की तुलना की गई है। वीडियो में 25 और 26 अगस्त की तस्वीरें एक साथ दिखाई गई हैं। इन तस्वीरों से बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में हुए बदलाव और तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई जगहों पर बाढ़ के तेज बहाव ने गांवों, सड़कों और दूसरे बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।

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नेपाल में फ्लैश फ्लड की वजह क्या बताई जा रही है?

  • नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा पर रासुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ग्लेशियर वाले इलाके के पास बर्फ और चट्टान का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिरा।
  • माना जा रहा है कि यह हिस्सा किसी ग्लेशियल झील में गिरा या इसकी वजह से नदी का रास्ता रुक गया।
  • इसके बाद ग्लेशियर की बर्फ, पिघले हुए पानी और मलबे से बना तेज बहाव नीचे की ओर आया। इस तरह के बहाव को ग्लेशियर-युक्त बाढ़ कहा जा सकता है।
  • यह बहाव लेंधे खोला से होते हुए भोटे कोशी नदी में जा मिला और इसके बाद नदी में अचानक बाढ़ आ गई।

भोटे कोशी नदी ने क्या-क्या किया तबाह?

अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि इसने 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, 40 सड़कें, 19 पुल और 10 बैंकों को नुकसान पहुंचाया। तिब्बत से सटे इलाकों में बाढ़ के कारण कई प्रोजेक्ट साइटें भी प्रभावित हुई हैं। अचानक आई इस बाढ़ ने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया और कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

384 पर्यटक लापता, 291 विदेशी नागरिक शामिल

नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के बाद 384 पर्यटक लापता हैं। इनमें भारत के सद्गुरु जग्गी वासुदेव की टीम के 77 लोग भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे थे। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और मलेशिया जैसे देशों के 291 लोग हैं। टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, लापता लोगों में बड़ी संख्या भारतीयों की है। इनमें कई भारतीय समुदाय के लोग शामिल हैं, जो तिब्बत स्थित हिंदुओं के पवित्र स्थल माउंट कैलाश की तीर्थयात्रा पर गए थे। इस वजह से नेपाल में आई बाढ़ का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े तीर्थयात्रियों पर भी पड़ा है।

पीएम मोदी ने नेपाल को मदद की पेशकश की

नेपाल में बाढ़ से हुई भारी तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। पीएम मोदी ने नेपाल को हर संभव मदद देने की पेशकश की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों की टीमें बचाव और राहत कार्यों के लिए मिलकर काम कर रही हैं।

पिछले साल भी आई थी ऐसी ही अचानक बाढ़

नेपाल के इन्हीं इलाकों में पिछले साल अगस्त में भी इसी तरह की अचानक बाढ़ आई थी। उस समय तिब्बत में ज्यादा तापमान के कारण एक ग्लेशियल झील ओवरफ्लो हो गई थी। उस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी। साथ ही नेपाल और चीन को जोड़ने वाले पुल समेत कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था। इस बार भी ग्लेशियर, बर्फ, पानी और मलबे के तेज बहाव ने नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में भारी तबाही मचाई है। सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आई शुरुआती स्थिति इस आपदा के बड़े पैमाने को दिखाती है।