Chhath Puja 2026: छठ पर बिहार लौटने वालों की मुश्किल बढ़ गई है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई से पटना की कई ट्रेनों में REGRET है, जबकि फ्लाइट किराया करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच गया।

छठ सिर्फ त्योहार नहीं, बिहार से बाहर रहने वाले लाखों परिवारों के लिए घर लौटने की भावनाओं का समय है। लेकिन इस बार 13 नवंबर को बिहार पहुंचने की तैयारी कर रहे प्रवासियों के सामने सफर ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता से पटना आने वाली कई ट्रेनों में REGRET दिख रहा है, जबकि हवाई टिकट कई रूटों पर 20 से 30 हजार रुपये के करीब पहुंच चुके हैं।

दिल्ली से मुंबई तक ट्रेन टिकट का संकट

दिल्ली-पटना रूट पर स्थिति सबसे ज्यादा दबाव वाली दिख रही है। PPTA फेस्टिवल स्पेशल में स्लीपर की वेटिंग 127 और AC-3 में REGRET है। नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में AC-3 की वेटिंग 179, सीमांचल एक्सप्रेस में स्लीपर 156 और अमृत भारत एक्सप्रेस में स्लीपर 180 तक पहुंच चुका है। मुंबई से पटना आने वाली ट्रेनों में भी स्लीपर की वेटिंग 120 से 177 तक दर्ज है। बेंगलुरु और चेन्नई से आने वाली प्रमुख ट्रेनों में कई श्रेणियों में REGRET यानी नो रूम की स्थिति है।

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ट्रेन नहीं मिली तो फ्लाइट भी जेब पर भारी

रेल टिकट नहीं मिलने पर हवाई सफर विकल्प जरूर है, लेकिन इसकी कीमत आम यात्री के बजट को बिगाड़ सकती है। 13 नवंबर को दिल्ली-पटना उड़ानों का किराया करीब ₹12,948 से ₹26,681 तक दर्ज है। स्पाइसजेट की एक उड़ान का किराया ₹24,933 है। बेंगलुरु-पटना रूट पर किराया ₹19,543 से बढ़कर ₹28,441 तक पहुंच रहा है, जबकि चेन्नई-पटना उड़ानों में यह करीब ₹13,630 से ₹29,920 तक है। कोलकाता से पटना का किराया तुलनात्मक रूप से कम है और ₹9,255 से शुरू हो रहा है।

छठ पर क्यों बढ़ जाती है सफर की कीमत?

छठ के दौरान बिहार लौटने की मांग अचानक बढ़ती है। सीमित सीटों के मुकाबले ज्यादा यात्री होने पर हवाई टिकट की कीमतें तेजी से बदलती हैं। इसके अलावा ईंधन और संचालन लागत भी किराए को प्रभावित करती है। ऐसे में प्रवासियों के सामने इस बार बड़ा सवाल यही है—घर तो जाना है, लेकिन ट्रेन मिलेगी नहीं और फ्लाइट जेब पर कितनी भारी पड़ेगी? छठ से पहले बढ़ती मांग ने बिहार की ओर होने वाले इस वार्षिक पलायन को एक बार फिर परिवहन व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बना दिया है।

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