Nepal Flash Flood 2026: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से उफनती नदियों ने मचाया तांडव। 392 मौतें और 1,468 लोग लापता! अब बनी 1,200 स्विमिंग पूल जितनी बड़ी झील, क्या 1 सितंबर को आएगा दूसरा खौफनाक सैलाब?

Nepal Second Flood: हिमालय की गोद में बसे शांत इलाकों पर अचानक मौत का साया मंडराने लगा। तिब्बत और नेपाल की सीमा पर ग्लेशियर टूटने से उफनती नदियों में चट्टान, बर्फ और गाद का ऐसा प्रलयकारी बहाव आया जिसने पूरे के पूरे गांवों का नामोनिशान मिटा दिया। महज़ कुछ ही घंटों में ताश के पत्तों की तरह घर, 25 मील से ज़्यादा सड़कें और 40 झूलते पुल (सस्पेंशन ब्रिज) बह गए। इस भयावह आपदा में अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें नेपाल में 389 और तिब्बत में 3 शव बरामद किए जा चुके हैं। इस आपदा में अब तक करीब 400 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सीमा के दोनों ओर लापता लोगों का आंकड़ा 1,468 तक पहुंच गया है।

1,468 लापता: 389 शव नेपाल में मिले, तिब्बत में भी मौतें

दुर्गम घाटियों में सेना के हेलीकॉप्टर और बचाव दल कीचड़ के बीच ज़िंदगी की तलाश कर रहे हैं। सीमा के दोनों तरफ कुल 1,468 लोग लापता हैं। इनमें नेपाल में 910 लोग (517 विदेशी) और तिब्बत में 558 लोग (260 विदेशी) शामिल हैं। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले हिंदू श्रद्धालु, दुनिया भर से आए ट्रेकर्स और स्थानीय निवासी शामिल हैं।

Scroll to load tweet…

लापता लोगों में ट्रेकर्स और कैलाश यात्री भी शामिल

लापता लोगों में नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले विदेशी नागरिकों के अलावा कैलाश पर्वत की यात्रा पर निकले हिंदू तीर्थयात्री भी शामिल हैं। कई गांवों के पूरी तरह तबाह होने और सड़क-पुल बह जाने से प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हेलीकॉप्टर और आपातकालीन टीमें लगातार जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटी हैं।

Scroll to load tweet…

40 पुल बह गए, सड़कें भी तबाह

अधिकारियों के अनुसार 25 मील से ज्यादा सड़कें नष्ट हुई हैं और करीब 40 सस्पेंशन ब्रिज बह गए। इससे कई समुदाय संपर्क से कट गए हैं। अलग-थलग इलाकों तक राहत पहुंचाने के लिए मलबे के बीच नई सड़कें बनाने की जरूरत पड़ रही है।

Scroll to load tweet…

1,200 स्विमिंग पूल जितना पानी: दूसरी बाढ़ की दहशत

आपदा का असली खौफ अभी बाकी है। नदियों का रास्ता मलबे से रुक जाने के कारण सीमा के दोनों ओर विशाल और खतरनाक झीलें बन गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, तिब्बत की तरफ बनी कृत्रिम झील में लगभग 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है, जो 1,200 ओलंपिक-साइज़ स्विमिंग पूल के बराबर है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने चेतावनी दी है कि एक झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और किनारे टूटने पर अचानक दूसरी बाढ़ आ सकती है। लोगों, यात्रियों और बचावकर्मियों को नदी किनारों और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी दी है और 1 सितंबर के आसपास इस रुकावट के टूटने से दूसरे भयंकर सैलाब की आशंका जताई जा रही है।

Scroll to load tweet…

ग्लेशियर टूटने से बढ़ा संकट

नेपाल और चीन दोनों ने आपदा को ग्लेशियर टूटने की घटना से जोड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे के नदी में आने से जलप्रवाह बाधित हुआ। ICIMOD के विशेषज्ञ कियांगगोंग झांग ने चेताया कि ऊपरी हिस्से में मलबे की रुकावट अभी बनी हुई है, इसलिए दूसरी बड़ी बाढ़ का खतरा टला नहीं है। आने वाले दिनों में बारिश इस संकट को और गंभीर बना सकती है।