Uzbek Wedding Rituals: उज्बेकिस्तान की शादी में पालोव यानी प्लोव का खास महत्व है। जानिए निकाह तोयी की परंपराएं, पालोव की खासियत और इसे बनाने की आसान रेसिपी।
अगर आपको लगता है कि भारतीय और उज्बेकिस्तान की शादियों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं होगा, तो यहां की निकाह तोयी (Nikoh Toyi) यानी शादी की परंपराओं के बारे में जानकर आप हैरान हो सकते हैं। उज्बेक शादी सिर्फ दूल्हा-दुल्हन का मिलन नहीं, बल्कि 2 परिवारों और कई बार पूरे मोहल्ले यानी महल्ला का बड़ा उत्सव होती है। शादी की रस्में कई फेजों में होती हैं और हर फेज का अपना नाम और महत्व है। सबसे खास बात है- इस पूरी कहानी में प्लोव यानी पालोव का बेहद खास रोल है।
शादी की शुरुआत भी होती है थोड़ी अलग
परंपरागत उज्बेक समाज में शादी से पहले दूल्हे के परिवार की महिलाएं लड़की के घर जाकर परिवार और लड़की के बारे में जानकारी लेती थीं। इसे सोवचिलिक यानी रिश्ता देखने और बातचीत की प्रोसेस से जोड़ा जाता है। इसके बाद सगाई की रस्म फातिहा तोई होती है। इस दौरान मिठाइयां और पारंपरिक भोजन परोसा जाता है।
शादी की सुबह ही शुरू हो जाता है दावत का सिलसिला
अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर - खाना। उज्बेक शादी में सुबह-सुबह पालोव या प्लोव बनाया जाता है। चावल, मांस, गाजर, प्याज और मसालों से बनने वाला यह व्यंजन वहां सिर्फ खाना नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। शादी के लिए तैयार किए जाने वाले खास पालोव को तोय पालोव कहा जाता है। बड़े आयोजनों में इसे बड़ी संख्या में मेहमानों के लिए बनाया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि शादी से जुड़े अलग-अलग मौकों पर पालोव की अलग परंपराएं हैं- दुल्हन की विदाई के समय किज ओशी शादी के मौके पर निको ओशी और दूल्हे के दोस्तों के लिए कुयोव ओशी जैसे नाम मिलते हैं। यानी शादी और पालोव का रिश्ता बेहद गहरा है।
दूल्हा-दुल्हन की रात की थाली में क्या होता है?
शादी की रात दूल्हा-दुल्हन को पालोव के साथ रोटी, सलाद, मिठाइयां और चाय परोसी जाती है।
दुल्हन की एंट्री भी बेहद खास
शादी के बाद जब दुल्हन दूल्हे के घर पहुंचती है, तो कई जगह उसे सफेद रास्ते यानी पायंदाज से घर में एंट्री कराया जाता है। दरवाजे पर वह ओस्टोना सालोम नाम की रस्म में झुककर नए घर का सम्मान करती है। कुछ परंपराओं में उसके ऊपर मिठाइयां और सिक्के डाले जाते हैं, जिन्हें खुशहाली और समृद्धि से जोड़ा जाता है।
उज्बेक शादी की एक और दिलचस्प रस्म केलिन सलोम है। इसमें दुल्हन पति के परिवार के रिश्तेदारों का अभिवादन करती है, बदले में परिवार के लोग उसे गिफ्ट देते हैं। कुछ जगहों पर रोटी को भी इस रस्म में शामिल किया जाता है, क्योंकि इसे पेट भरने और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
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दूल्हा-दुल्हन के कपड़े कैसे होते हैं?
उज्बेक शादियों में दुल्हन अक्सर खूबसूरत सफेद वेडिंग ड्रेस और दूल्हा सूट पहनता है। पारंपरिक कपड़ों और स्थानीय कढ़ाई का इस्तेमाल भी कई परिवारों में होता है। शादी के लिए कपड़े और जूते गिफ्ट में देने की परंपरा को सारपो कहा जाता है।
यानी उज्बेक शादी की सबसे खास बात यह है- यहां खाना, परिवार, पड़ोसी और रस्में, सब मिलकर शादी को उत्सव बना देते हैं। और इस पूरी दावत का दिल कहा जाए तो वह है - पालोव। 2016 में पालोव की संस्कृति और उससे जुड़ी परंपराओं को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत लिस्ट में भी शामिल किया गया था।
पालोव/प्लोव बनाने का आसान तरीका
सामग्री
- 500 ग्राम बासमती या लंबे दाने वाला चावल
- 500 ग्राम मटन या बीफ
- 500 ग्राम गाजर
- 2-3 प्याज
- 150-200 ml तेल
- 1 पूरा लहसुन
- जीरा
- नमक
- काली मिर्च
- पानी
बनाने की विधि
1. चावल तैयार करें- चावल को अच्छी तरह धोकर करीब 30 मिनट पानी में भिगो दें।
2. तेल गर्म करें - कड़ाही या भारी तले वाले बर्तन में तेल गर्म करें। पारंपरिक तरीके में इसे कज़ान में बनाया जाता है।
3. प्याज और मांस भूनें - प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें। फिर मटन के टुकड़े डालकर तेज आंच पर अच्छी तरह भूनें।
4. गाजर डालें - गाजर को लंबा-लंबा काटकर मांस के ऊपर डालें। इसमें नमक और जीरा मिलाएं। थोड़ा पानी डालकर इसे पकने दें। इस मिश्रण को उज्बेक खाना पकाने में zirvak कहा जाता है।
5. चावल की परत लगाएं - अब भीगे हुए चावल को ऊपर से समान रूप से फैला दें। चावल को तुरंत नीचे मौजूद मांस और गाजर में न मिलाएं। ऊपर से पानी डालें, ताकि चावल अच्छी तरह पक सके।
6. लहसुन डालें - पूरा लहसुन चावल के बीच में दबा दें। ढककर धीमी आंच पर पकाएं।
7. आखिर में मिलाएं - जब चावल पक जाए और पानी लगभग खत्म हो जाए, तब आंच बंद करके कुछ मिनट इसे छोड़ दें। फिर नीचे के मांस, गाजर और चावल को हल्के हाथ से मिलाएं।
पालोव का स्वाद कैसा होता है?
पालोव में चावल अलग-अलग और खुशबूदार रहते हैं। मांस से निकला स्वाद, गाजर की हल्की मिठास, जीरा और लहसुन इसे खास बनाते हैं। उज्बेकिस्तान में इसे अक्सर दावत और मेहमाननवाजी से जोड़ा जाता है, यही वजह है कि शादी और बड़े समारोहों में इसका खास महत्व है।
