RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा कि विविधता में एकता भारत और अमेरिका दोनों के DNA में है। जानिए मुसलमानों, हिंदुत्व और इंसानियत पर उनके प्रमुख विचार।

New York: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि एकता और विविधता सिर्फ कोई नारे नहीं हैं, बल्कि यह भारत और अमेरिका दोनों ही देशों के DNA में शामिल हैं। खास बात यह रही कि इस कार्यक्रम की पहली पंक्ति में अलग-अलग धर्मों के प्रमुख नेता भी मौजूद थे।

Mohan Bhagwat Speech: भारत-अमेरिका के DNA में एकता और विविधता

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में लोगों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि एकता और विविधता भारत और अमेरिका, दोनों के DNA का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के संदर्भ में आमतौर पर ‘बहुलता’ यानी plurality की बात होती है, जबकि भारत के लिए ‘विविधता में एकता’ का विचार ज्यादा प्रमुख है। भागवत ने कहा, “यह एकता और यह विविधता, दोनों ही इसके DNA में हैं।” उन्होंने अपने संबोधन में भारत की भूमिका को केवल एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं माना। उनके मुताबिक राष्ट्र सिर्फ भौगोलिक सीमाओं से बनी इकाई नहीं हैं, बल्कि विश्व व्यवस्था में हर राष्ट्र का एक अलग दायित्व भी है।

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Mohan Bhagwat on Unity: भाषा और धर्म अलग, इंसानियत एक

RSS प्रमुख ने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, धर्म और जीवनशैली कई बार लोगों को यह महसूस करा सकती हैं कि हम एक-दूसरे से अलग हैं। उन्होंने इसे इंसानी जीवन की भौतिक सच्चाई से जोड़ते हुए कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जरूरतें होती हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर उन्हें भूख नहीं लगी है, तो इसका मतलब यह नहीं कि सामने वाले व्यक्ति को भी भूख नहीं लगी होगी। यानी शारीरिक और व्यक्तिगत स्तर पर इंसान अलग हैं। लेकिन भागवत के मुताबिक इसके साथ एक स्वाभाविक एकता भी मौजूद है।

RSS Chief Speech: इंसान सोच सकता है, लेकिन सोचने का तरीका जरूरी

अपने भाषण के दौरान उन्होंने जीवन के दर्शन और इंसानी व्यवहार पर भी सीधी बात की। उन्होंने कहा कि विविधता का हमेशा सम्मान होना चाहिए, लेकिन अपनी अंदरूनी एकता को कभी भूलना नहीं चाहिए। भागवत ने जानवरों का उदाहरण देते हुए समझाया कि जानवर अपनी प्राकृतिक ज़रूरतों से बंधे होते हैं। वे सिर्फ जीने और खाने के लिए काम करते हैं। लेकिन इंसान सोच सकता है। इंसान यह योजना बना सकता है कि आज पेट भरा है तो कल के लिए खाना बचाकर कैसे रखना है। पर असली बात यह है कि इंसान सोचता कैसे है? अगर सोच सही रास्ते पर है, तो व्यक्ति ईश्वर के करीब जाता है, और अगर सोच गलत दिशा में चली जाए, तो इंसान जानवरों के स्तर पर गिर जाता है।

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Mohan Bhagwat on Muslims: हिंदू वही जो हर इंसान की गरिमा माने

दिन में हुए एक दूसरे संवाद कार्यक्रम के दौरान जब मुसलमानों से जुड़ा सवाल उठा, तो भागवत ने काफी साफ शब्दों में अपना रुख रखा। उन्होंने कहा कि कोई भी हिंदू अगर यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए, तो वह असल में हिंदू कहलाने के लायक ही नहीं है। हिंदुत्व का मतलब ही यही है कि आप हर इंसान की गरिमा का सम्मान करें और यह समझें कि सभी रास्ते एक ही मंजिल की तरफ जाते हैं। राजनीति पर तंज कसते हुए 75 वर्षीय संघ प्रमुख ने कहा कि आजकल राजनीति केवल अपने फायदे का खेल बनकर रह गई है, जबकि RSS की सीख सिर्फ देना है, बदले में कुछ मांगना नहीं।

RSS Volunteers: 1996 के चरखी दादरी विमान हादसे का किया जिक्र

अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने 1996 में चरखी दादरी में हुए भीषण हवाई हादसे की याद दिलाई। उस हादसे में दो प्लेन आपस में टकरा गए थे और 349 लोगों की जान चली गई थी। हादसे में मारे गए ज्यादातर यात्री मुस्लिम देशों के थे। भागवत ने बताया कि हादसे की खबर मिलते ही सबसे पहले RSS के स्वयंसेवक मदद के लिए पहुंचे थे। उन्होंने घायलों को संभाला और मृतकों के शवों की पहचान व अंतिम संस्कार कराने में मदद की। उस वक्त किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला किस धर्म का है, सिर्फ मदद की भावना थी।

Zohraan Mamdani vs RSS: भागवत के अमेरिका दौरे से पहले बढ़ा विवाद

भागवत के इस दौरे का न्यूयॉर्क में कुछ विरोध भी देखने को मिला। न्यूयॉर्क के पहले भारतीय-अमेरिकी और मुस्लिम मेयर ज़ोहरान ममदानी ने RSS की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार भारत की जिस धर्मनिरपेक्ष और समावेशी तस्वीर को मानता आया है, RSS की विचारधारा उसके विपरीत एक अलग-थलग करने वाली सोच को बढ़ावा देती है। हालांकि, विरोध के बीच भी मोहन भागवत अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत अमेरिका में विभिन्न सम्मेलनों और मुलाकातों में हिस्सा ले रहे हैं।