Kab Hai Bakra Eid 2026: क्या है ईद उल अजहा की सही डेट, 27 या 28 मई? जानें सही तारीख

Published : May 23, 2026, 02:25 PM IST
Kab Hai Bakra Eid 2026

सार

Bakra Eid 2026 Date: मुस्लिम समुदाय में भी समय-समय पर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। ईद उल अजहा भी इनमें से एक है। इसे बकरा ईद भी कहते हैं। इस बार ये त्योहार मई 2026 में मनाया जाएगा। जानें क्या है इसकी सही डेट?

Bakra Eid 2026: धुल हिज्जा इस्लामिक कैलेंडर का 12वां और अंतिम महीना होता है। इसी महीने में ईद उल अजहा यानी बकरा ईद का त्योहार मनाया जाता है। यह इस्लाम धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। ईद उल अजहा को आम भाषा में बकरा ईद या बकरीद भी कहा जाता है। यह त्योहार कुर्बानी और त्याग का प्रतीक माना जाता है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार कुर्बानी देते हैं। आइए जानते हैं साल 2026 में बकरा ईद कब मनाई जाएगी…

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कब है बकरा ईद 2026?

इस्लामिक कैलेंडर में 12 महीने होते हैं और इसका अंतिम महीना धुल हिज्जा कहलाता है। इसी महीने की 10वीं तारीख को ईद उल अजहा मनाई जाती है। इस्लाम धर्म में यह महीना बेहद पवित्र माना जाता है। सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों में 18 मई से धुल हिज्जा महीना शुरू हो गया था, इसलिए इन देशों में बकरीद 27 मई मनाई जाएगी। जबकि भारत में ये त्योहार अगले दिन यानी 28 मई को मनाया जाएगा।

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कैसे मनाते हैं ईद उल अजहा?

ईद उल अजहा के मौके पर लोग सुबह जल्दी उठकर साफ कपड़े पहनकर अल्लाह की इबादत करते हैं। ईद की नमाज अदा करने मस्जिद जाते हैं। नमाज के बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है। लोग एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। इस दिन रिश्तेदारों और दोस्तों के घर जाकर मुलाकात करने की भी परंपरा है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को खाना, कपड़े और अन्य जरूरी सामान देकर मदद की जाती है।

क्यों देते हैं बकरे की कुर्बानी?

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह के नेक बंदे थे। एक बार अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनसे सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने को कहा। अल्लाह की बात मानकर हजरत इब्राहिम अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। जब वे अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे तो अल्लाह ने उनकी श्रद्धा और समर्पण देखकर बेटे की जगह एक जानवर को कुर्बानी के लिए भेज दिया। तभी से ईद उल अजहा यानी बकरा ईद पर जानवर की कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई।

 

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