
Chaitra Navratri 2026 Jware Visarjan Date: चैत्र मास की नवमी बहुत खास होती है क्योंकि इसके पहले दिन से ही हिंदू नववर्ष की शुरूआत होती है। इस बार ये नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक मनाई जा रही है। नवरात्रि के पहले दिन जवार भी बोए जाते हैं। जवारों को बहुत ही पवित्र माना जाता है। नवरात्रि के बाद इन जवारों को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है। जानें इस बार चैत्र नवरात्रि के बाद जवारे विसर्जन कब करें, इसकी पूरी विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र सहित अन्य खास बातें…
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धर्म ग्रंथों के अनुसार चैत्र नवरात्रि समाप्त होने के अगले दिन यानी दशमी तिथि पर जवारे विसर्जन करना चाहिए। इस बार चैत्र शुक्ल दशमी तिथि 28 मार्च, शनिवार को है यानी इसी दिन जवारे विसर्जन किए जाएंगे। ये हैं जवारे विसर्जन का मुहूर्त…
- सुबह 07:58 से 09:29 तक
- दोपहर 12:07 से 12:56 तक (अभिजीत मुहूर्त)
- दोपहर 12:32 से 02:03 तक
- दोपहर 03:34 से 05:05 तक
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- 28 मार्च, शनिवार की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। विसर्जन से पहले शुभ मुहूर्त में देवी मां की पूजा करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और ये मंत्र बोलें-
रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे।।
महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते।।
- देवी की पूजा के बाद जवारों की भी चावल, फूल, कुमकुम आदि से पूजा करें। जवारों को सिर पर रखकर किसी नदी या तालाब तक लेकर जाएं और विसर्जन से पहले नीचे लिखा मंत्र बोलें-
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।
- विधि-विधान से जवारे विसर्जन करने के बाद देवी मां से घर की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इस प्रकार जवारे विसर्जन करने से आपकी हर तरह की परेशानी दूर हो सकती है।
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