
Devi Mahagauri Puja Vidhi: चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि बहुत ही खास मानी गई है इसे जया तिथि भी कहते हैं। इस तिथि पर देवी दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा का विधान है। देवी के इस रूप से जुड़ी कथाएं भी प्रचलित हैं। उसके अनुसार जब देवी पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए तपस्या की तो उनका शरीर काला हो गया। बाद में महादेव के वरदान से देवी पार्वती अत्यंत गौरी हो गईं, इसलिए इनका नाम महागौरी पड़ा। चैत्र नवरात्रि 2026 में देवी महागौरी की पूजा 26 मार्च, गुरुवार को की जाएगी। आगे जानिए देवी महागौरी की पूजा विधि, मंत्र, शुभ मुहूर्त व आरती…
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सुबह 11:01 से दोपहर 12:32 तक
दोपहर 02:03 से 03:34 तक
दोपहर 12:32 से 02:03 तक
दोपहर 02:03 से 03:34 तक
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- 26 अक्टूबर, गुरुवार को ऊपर बताए किसी भी मुहूर्त में देवी महागौरी की पूजा करें।
- सबसे पहले देवी महागौरी की तस्वीर अपने घर में साफ स्थान पर स्थापित करें।
- देवी महागौरी के चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
- दीपक लगाएं। अबीर, गुलाल, रोली, हल्दी, सुपारी आदि चीजें एक-एक कर चढ़ाएं।
- देवी महागौरी को नारियल या इससे बनी किसी मिठाई का का भोग लगाएं।
- नीचे लिखे मंत्र का जाप 108 बार बोलकर आरती करें-
श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरी वहां निवासा॥
चंद्रकली ओर ममता अंबे। जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती सत हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
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