
Dhanteras Mantra Puja Vidhi: धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु के अनेक अवतार बताए गए हैं, धन्वंतरि भी इनमें से एक है। धन्वंतरि ही समुद्र मंथन में से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस तिथि पर धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। धनतेरस से जुड़ी और भी कईं मान्यताएं हैं। कहते हैं कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा से परिवार के लोग निरोगी यानी स्वस्थ रहते हैं। आगे जानिए भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और आरती…
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा शाम के समय करना शुभ माना जाता है। 6 नवंबर को पूजा के लिए ये दो मुहूर्त रहेंगे—
वृषभ लग्न: शाम 6:02 से रात 7:57 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:33 से 6:51 बजे तक
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- धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद पूजा और व्रत करने का संकल्प लें। पूरे दिन घर में साफ-सफाई रखें और मन को शांत बनाए रखें।
- शाम को पूजा के समय से पहले सभी जरूरी सामग्री एक जगह रख लें। घर के किसी साफ स्थान पर लकड़ी का बाजोट रखें और उस पर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान धन्वंतरि का ध्यान करते हुए नीचे दिया गया मंत्र बोलें—
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं, अन्वेषित च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं।।
- अब भगवान को कुमकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाकर गंध, अबीर, गुलाल और रोली अर्पित करें।
- पूजा में मौली को वस्त्र के रूप में चढ़ाएं। इसके अलावा पान, लौंग और सुपारी अर्पित करें। शंखपुष्पी, तुलसी और ब्राह्मी जैसी औषधियां भी चढ़ा सकते हैं।
- भगवान धन्वंतरि को खीर का भोग लगाएं। इसके बाद ऊं धन्वंतरये नमः मंत्र का जाप करें और अंत में उनकी आरती करें।
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।। जय धन्वं.।।
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।। जय धन्वं.।।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।। जय धन्वं.।।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।। जय धन्वं.।।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।। जय धन्वं.।।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।। जय धन्वं.।।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।। जय धन्वं.।।
Disclaimer
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