
Durva Ashtami Kab Hai: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दूर्वा अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश करने का विधान है। मान्यता है कि इस व्रत में भगवान श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित की जाए तो भक्तों की हर मनोकामना पूरी हो सकती है। आगे जानिए इस बार कब है दूर्वा अष्टमी, कैसे करें पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें आदि पूरी डिटेल…
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को दोपहर 1:01 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर, शनिवार को दोपहर 3:27 बजे तक रहेगी। दूर्वा अष्टमी का व्रत चंद्रोदय तिथि को ध्यान में रखकर किया जाता है, ये स्थिति 18 सितंबर को बन रही है, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।
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18 सितंबर, शुक्रवार को दूर्वा अष्टमी व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजे से शाम 06 बजकर 23 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 05 घण्टे 22 मिनट का समय मिलेगा।
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- दूर्वा अष्टमी के दिन भगवान गणेश की पूजा विधि-विधान से करनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की तैयारी करें।
- शुभ मुहूर्त में गणेश की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। गणेशजी को कुमकुम से तिलक लगाएं और फूल या फूलों की माला अर्पित करें।
- इसके बाद अबीर, गुलाल, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, जनेऊ आदि पूजा सामग्री भगवान गणेश को चढ़ाएं। पूजा में दूर्वा चढ़ाना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
- गणेशजी को दूर्वा अर्पित करते समय ये मंत्र बोलें- श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि। दूर्वा पर हल्दी लगाकर अर्पित करना भी शुभ होता है।
- अंत में भगवान गणेश को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं और आरती करें। इस तरह पूजा-व्रत करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।
- पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में अनलासुर नाम का एक शक्तिशाली दैत्य था। उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया था। परेशान होकर सभी देवता भगवान गणेश के पास पहुंचे और उनसे सहायता मांगी।
- इसके बाद भगवान गणेश और अनलासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान गणेशजी ने अपना विशाल रूप धारण किया और अनलासुर को निगल लिया। लेकिन उसे निगलने के बाद भगवान गणेश के पेट में तेज जलन होने लगी।
- कहा जाता है कि तब ऋषियों ने दूर्वा को पीसकर भगवान गणेश को खिलाया। दूर्वा के शीतल प्रभाव से उनके पेट की जलन शांत हो गई। इसी वजह से धार्मिक मान्यताओं में दूर्वा को भगवान गणेश की प्रिय चीजों में शामिल किया गया है और उनकी पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
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