Goverdhan Puja 2026: 9 या 10 नवंबर, कब करें गोवर्धन पूजा? जानें विधि, मुहूर्त, कथा और महत्व

Published : Nov 08, 2026, 01:21 PM IST
Goverdhan Puja 2026

सार

Goverdhan Puja 2026: दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने की परंपरा है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट और सुहाग पड़वा के नाम से भी जाना जाता है।

Govardhan Puja 2026 Kab Hai: हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है। मथुरा, वृंदावन और गोकुल में इस पर्व की खास रौनक रहती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुल के लोगों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाया था। इस दिन महिलाएं घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर असमंजस है। आइए जानते हैं कि इस बार यह पर्व 9 या 10 नवंबर को मनाया जाएगा।

क्या है गोवर्धन पूजा 2026 की सही तारीख?

आमतौर पर गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन होती है, लेकिन इस बार तिथियों के संयोग के कारण पर्व अगले दिन नहीं मनाया जाएगा। दिवाली 8 नवंबर, रविवार को है। इसके अगले दिन यानी 9 नवंबर, सोमवार को अमावस्या तिथि सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय 10 नवंबर, मंगलवार को होगा। इसलिए उदया तिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 10 नवंबर को मनाना उचित रहेगा।

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गोवर्धन पूजा 2026 के शुभ मुहूर्त

सुबह 06:40 से 08:50 तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 से दोपहर 12:32 तक

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गोवर्धन पूजा कैसे करें? जानें विधि

- गोवर्धन पूजा करने वाले लोग 10 नवंबर, मंगलवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पूजा का संकल्प लें।
- पूरे दिन मन को शांत रखें और सात्विक भोजन करें। किसी की बुराई, चुगली या विवाद करने से बचें। मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें।
- शुभ मुहूर्त में घर के आंगन या पूजा की जगह पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसके पास भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- गोवर्धन पर्वत को फूलों की माला पहनाएं। कुमकुम, चावल और फूल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान को भोग लगाएं और आरती करें।
- भगवान श्रीकृष्ण की भी विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान-दक्षिणा दें।

गोवर्धन पूजा की कथा

श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में बाल रूप में रहते थे, तब वहां के लोग अच्छी बारिश और खुशहाली के लिए इंद्रदेव की पूजा करते थे। यह देखकर श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि इंद्रदेव बारिश जरूर करते हैं, लेकिन गायों को चारा और लोगों को जीवनयापन का सहारा गोवर्धन पर्वत से मिलता है। इसलिए सभी को गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।
गोकुल के लोगों ने श्रीकृष्ण की बात मान ली और इंद्रदेव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा की। इससे नाराज होकर इंद्रदेव ने पूरे गोकुल में तेज बारिश शुरू कर दी। गांव के लोगों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सभी ग्रामीण अपने पशुओं के साथ पर्वत के नीचे आ गए और बारिश से सुरक्षित रहे।
कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण ने लगातार सात दिनों तक पर्वत उठाए रखा। यह देखकर इंद्रदेव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आ गया कि श्रीकृष्ण कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसके बाद इंद्रदेव ने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। मान्यता है कि तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।


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