Guru Purnima Motivational Quotes: महर्षि वेदव्यास के 5 अनमोल वचन, जो आपकी लाइफ में ला सकते हैं पॉजिटिव चेंज

Published : Jul 29, 2026, 08:17 AM IST
Guru Purnima 2026

सार

Guru Purnima: इस बार गुरु पूर्णिमा के पर्व 29 जुलाई 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन गुरु की पूजा करने के साथ-साथ इनकी बातों को भी जीवन में उतारना चाहिए।

Guru Purnima 2026: आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा या व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। वेद, पुराण और महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास को आदि गुरु भी कहा जाता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके कुछ ऐसे प्रेरणादायक वचन जानते हैं, जो आज भी जीवन को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं।

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1. माता ही होती है पहली गुरु

श्लोक:
मातरं पितरं चैव दृष्ट्वा पुत्रो धर्मवित्।
प्रथमं मातरं वन्देत् पश्चात् पितरमेव च॥
अर्थ: महर्षि वेदव्यास के अनुसार, माता ही मनुष्य की पहली गुरु होती है। इसलिए जीवन में सबसे पहले माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने माता-पिता का आदर करता है, उसके जीवन में सुख और सफलता बनी रहती है।

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2. परोपकार सबसे बड़ा पुण्य है

श्लोक:
परोपकारः पुण्याय पापाय परपीड़नम्॥
अर्थ: दूसरों की सहायता करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है, जबकि किसी को दुख पहुंचाना सबसे बड़ा पाप है। वेदव्यासजी का मानना था कि मनुष्य को हमेशा दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।

3. धर्म की रक्षा करने वाला सुरक्षित रहता है
श्लोक:
धर्मो रक्षति रक्षितः॥
अर्थ: जो व्यक्ति धर्म, सत्य और नैतिकता का पालन करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आएं, सही रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

4. क्षमा सबसे बड़ा धर्म है
श्लोक:
क्षमा धर्मः क्षमा यज्ञः क्षमा वेदाः क्षमा श्रुतम्।
क्षमायाः परमो लाभः क्षमा स्वर्गस्य कारणम्॥
अर्थ: महर्षि वेदव्यास ने क्षमा को सबसे बड़ा धर्म बताया है। क्षमा करने वाला व्यक्ति मन की शांति प्राप्त करता है और समाज में सम्मान भी पाता है। क्रोध की जगह क्षमा को अपनाना ही सच्ची महानता है।

5. बुराई पर अच्छाई से विजय पाएं
श्लोक:
अक्रोधेन जयेत् क्रोधम् असाधुं साधुना जयेत्।
जयेत् सत्येन चानृतम्॥
अर्थ: क्रोध को शांति से, बुराई को अच्छाई से और झूठ को सत्य से हराना चाहिए। यही एक श्रेष्ठ व्यक्ति की पहचान होती है। वेदव्यासजी के अनुसार, संयम और सदाचार ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति हैं।

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