Pitru Paksha Shradh Rules: हिंदू धर्म में श्राद्ध से जुड़े अनेक नियम हैं। बहुत से लोगों को इन नियमों के बारे में पता नहीं होता जिसके चलते वे श्राद्ध करते समय गलतियां कर बैठते हैं। इसलिए उन्हें श्राद्ध का पूरा फल नही मिल पाता।
Shradh Tithi Rules: इस बार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो चुका है जो 10 अक्टूबर तक रहेगा। इस दिन लोग मृत्यु तिथि पर अपने परिजनों का श्राद्ध करते हैं। कईं बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति की मृत्यु अलग तिथि पर हुई हो और उसका अंतिम संस्कार दूसरी तिथि पर हुआ हो। ऐसी स्थिति में लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता हैं कि श्राद्ध किस तिथि पर करें, मृत्यु हुई उस तिथि पर या दाह संस्कार हुआ, उस तिथि पर? इस प्रश्न का उत्तर जानिए उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से…
क्यों होता है श्राद्ध तिथि को लेकर कन्फ्यूजन?
मान लीजिए किसी व्यक्ति का निधन 5 अक्टूबर को हुआ, लेकिन किसी कारण से उनका दाह संस्कार 6 अक्टूबर को किया गया। ऐसे में दोनों तारीखों की तिथि अलग हो सकती है। पितृ पक्ष में श्राद्ध तय करते समय मृत्यु के समय जो तिथि थी, उसी तिथि को देखा जाएगा। यानी अगर मृत्यु के समय कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि थी, तो पितृ पक्ष में दशमी तिथि के दिन ही उनका श्राद्ध किया जाएगा। केवल इस वजह से कि दाह संस्कार अगले दिन हुआ था, श्राद्ध की तिथि नहीं बदलेगी।
ये भी पढ़ें-
October 2026 Calendar: शारदीय नवरात्रि कब से? जानें दशहरा, करवा चौथ सहित पूरे महीने के व्रत-त्योहारों की डेट
गरुड़ पुराण से जानें सही तिथि
गरुड़ पुराण में श्राद्ध से जुड़े नियम बताते हुए मृत्यु तिथि को महत्व दिया गया है। इसके एक श्लोक में कहा गया है-
सा तिथिर्मासिके श्राद्धे मृतो यस्मिन् दिने नरः।
अर्थ- जिस तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि पर श्राद्ध करना चाहिए। चाहे दाह संस्कार किसी अन्य तिथि पर ही क्यों न किया गया हो। इसलिए इस श्लोक को पितृ पक्ष के संदर्भ में समझते समय मृत्यु के समय की तिथि को आधार मानना चाहिए, न कि सिर्फ दाह संस्कार की तारीख को।
ये भी पढ़ें-
Shradh Ke Niyam: श्राद्ध के दिन मांस-मदिरा से लेकर झगड़े तक, नहीं करना चाहिए ये 10 काम
एक दिन में 2 तिथि हो तो
कईं बार एक ही दिन में 2 तिथियों का संयोग बन जाता है। ऐसी स्थिति में मृत्यु के समय को ध्यान में रखते हुए तिथि का चयन करना चाहिए जैसे यदि 8 अक्टूबर की दोपहर 2 बजे तक तृतीया और उसके बाद चतुर्थी तिथि है और यदि व्यक्ति की मृत्यु 2 बजे बाद हुई तो श्राद्ध के लिए चतुर्थी तिथि का ही चयन करें। अगर किसी परिजन की मृत्यु की सही तिथि पता नहीं है या परिवार को तिथि याद नहीं है, तो सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
