
Guru Purnima Ki Aarti Lyrics In Hindi: हर साला आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस बार ये उत्सव 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। इस पर्व का धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। इस पर्व में लोग अपने-अपने गुरुओं की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा के बाद गुरु की आरती भी जरूर करनी चाहिए क्योंकि इसके बिना पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। आगे जानिए कैसे करें गुरु की आरती…
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गुरु को पैरों को साफ जल से धोएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद गुरु के मस्तक पर कुमकुम से तिलक लगाएं। अपनी इच्छा अनुसार कपड़े, मिठाई, फल और धन राशि आदि भेंट करें। इसके बाद गुरु के पैर छूकर आशीर्वाद लें। थाली में दीपक लेकर गुरुदेव की आरती करें। इस तरह विधि-विधान से गुरु की पूजा-आरती करने से आपके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
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जय गुरुदेव अमल अविनाशी, ज्ञानरूप अन्तर के वासी,
पग पग पर देते प्रकाश, जैसे किरणें दिनकर कीं।
आरती करूं गुरुवर की॥
जब से शरण तुम्हारी आए, अमृत से मीठे फल पाए,
शरण तुम्हारी क्या है छाया, कल्पवृक्ष तरुवर की।
आरती करूं गुरुवर की॥
ब्रह्मज्ञान के पूर्ण प्रकाशक, योगज्ञान के अटल प्रवर्तक।
जय गुरु चरण-सरोज मिटा दी, व्यथा हमारे उर की।
आरती करूं गुरुवर की।
अंधकार से हमें निकाला, दिखलाया है अमर उजाला,
कब से जाने छान रहे थे, खाक सुनो दर-दर की।
आरती करूं गुरुवर की॥
संशय मिटा विवेक कराया, भवसागर से पार लंघाया,
अमर प्रदीप जलाकर कर दी, निशा दूर इस तन की।
आरती करूं गुरुवर की॥
भेदों बीच अभेद बताया, आवागमन विमुक्त कराया,
धन्य हुए हम पाकर धारा, ब्रह्मज्ञान निर्झर की।
आरती करूं गुरुवर की॥
करो कृपा सद्गुरु जग-तारन, सत्पथ-दर्शक भ्रांति-निवारण,
जय हो नित्य ज्योति दिखलाने वाले लीलाधर की।
आरती करूं गुरुवर की॥
आरती करूं सद्गुरु की
प्यारे गुरुवर की आरती, आरती करूं गुरुवर की।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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