
Hariyali Amavasya 2026: श्रावण मास की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं। धर्म ग्रंथों में इस अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन पितृ देवता और महादेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। हरियाली अमावस्या की एक कथा भी है, जिसे सुनने के बाद ही इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़िए हरियाली अमावस्या की व्रत कथा…
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बहुत समय पहले एक नगर में एक धनवान व्यापारी रहता था। उसके परिवार में पत्नी, बेटा और बहू थे। परिवार में किसी चीज की कमी नहीं थी, लेकिन घर की बहू का जीवन हमेशा परेशानियों से घिरा रहता था। ससुराल के लोग अक्सर उसे ताने देते और छोटी-छोटी बातों पर दोषी ठहराते थे।
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बहू स्वभाव से धार्मिक थी। वह भगवान की भक्ति करती और रोज पूजा-पाठ में समय बिताती थी। एक दिन एक साधु उसके घर आए। बहू ने श्रद्धा से उनकी सेवा की। साधु उसकी परेशानी समझ गए और बोले कि यदि वह हर अमावस्या पर पीपल की पूजा करे और व्रत रखे, तो उसके जीवन की कठिनाइयां दूर हो सकती हैं।
साधु के कहने पर बहू हर अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा करने लगी। वह सुबह स्नान कर पीपल को जल चढ़ाती, दीपक जलाती और भगवान विष्णु का स्मरण करती। धीरे-धीरे उसकी श्रद्धा और भक्ति बढ़ती गई। कुछ समय बाद घर में सकारात्मक बदलाव दिखने लगे। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होने लगी और घर में सुख-शांति का वातावरण बनने लगा।
जो लोग पहले बहू की बुराई करते थे, वे भी उसके व्यवहार और भक्ति की प्रशंसा करने लगे। एक दिन व्यापारी को व्यापार में बड़ा लाभ हुआ। परिवार के सभी सदस्यों को यह एहसास हुआ कि घर में आए शुभ परिवर्तन के पीछे बहू की श्रद्धा और पूजा का बड़ा योगदान है। इसके बाद परिवार ने भी अमावस्या के दिन पूजा और दान-पुण्य करना शुरू कर दिया।
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